निमिषा प्रिया को जल्द फांसी देने की मांग तेज, ब्लड मनी से भी अब नहीं बच सकेगी जान

यमन में हत्या के एक जघन्य मामले में दोषी ठहराई गई भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को अब जल्द ही फांसी दिए जाने की संभावना बढ़ गई है। यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या में दोषी पाई गईं निमिषा के खिलाफ अब तलाल के परिवार ने सख्त रुख अपनाया है। खासकर, तलाल के भाई अब्दुल फतेह ने यमन की अदालत को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि निमिषा को बिना किसी देरी के फांसी की सजा दी जाए।

यह मांग ऐसे समय आई है जब पहले निर्धारित 16 जुलाई की तारीख को फांसी पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन अब परिवार का कहना है कि वो किसी प्रकार की माफी या सुलह को स्वीकार नहीं करेंगे। मनोरमा की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के अटॉर्नी जनरल जज अब्दुल सलाम अल हूती को भेजे गए पत्र में अब्दुल फतेह ने स्पष्ट लिखा है कि निमिषा को तत्काल दंडित किया जाए। परिवार की ओर से यह भी कहा गया है कि उन्होंने माफ करने या किसी सुलह पर पहुंचने के सभी रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए हैं।

पत्र में फतेह ने यह भी उल्लेख किया कि पहले 25 जुलाई को उन्होंने एक और पत्र भेजकर अदालत से मौत की सजा की नई तारीख घोषित करने की अपील की थी। उन्होंने भारतीय मीडिया में आ रही उन रिपोर्ट्स पर भी कड़ी आपत्ति जताई, जिनमें संभावित ब्लड मनी समझौते की चर्चा हो रही थी। उनका कहना था, तलाल का खून किसी सौदेबाजी की वस्तु नहीं है और परिवार कभी भी न्याय के साथ समझौता नहीं करेगा।

निमिषा प्रिया का यह मामला 2018 से चर्चा में है, जब यमन में रहकर नर्स के रूप में काम कर रही भारतीय महिला पर यमनी नागरिक तलाल की हत्या का आरोप लगा। प्रारंभिक रिपोर्ट्स में सामने आया कि निमिषा और तलाल ने एक साथ क्लीनिक खोलने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में उनके संबंधों में कड़वाहट आ गई। बताया जाता है कि तलाल ने निमिषा का पासपोर्ट अपने कब्जे में रख लिया था और इसे वापस पाने के लिए निमिषा ने उसे बेहोश करने की कोशिश की, लेकिन गलत डोज देने से उसकी मौत हो गई।

इस घटना के बाद निमिषा को गिरफ्तार किया गया और उसे मौत की सजा सुनाई गई। अब जब परिवार ने ब्लड मनी (मुआवज़े) के किसी भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, तो निमिषा की फांसी टलने की उम्मीदें भी लगभग समाप्त हो चुकी हैं। यमन के कानून में यदि पीड़ित का परिवार दोषी को माफ कर दे तो फांसी की सजा को बदला जा सकता है, लेकिन यहां हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। अब पूरा मामला इस बात पर टिक गया है कि अदालत नई तारीख कब तय करती है और सजा कब अमल में लाई जाती है।

यह मामला भारत और यमन के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी संवेदनशीलता का विषय बन गया है, लेकिन फिलहाल पीड़ित परिवार का रुख बिल्कुल स्पष्ट है—उन्हें सिर्फ न्याय चाहिए और वह जल्द से जल्द।