मतदान से पहले बांग्लादेश में फिर हिंदू की हत्या, चाय बागान से बरामद हुआ खून से सना शव

बांग्लादेश में चुनावी माहौल के बीच हिंसा की एक और गंभीर घटना सामने आई है। मतदान से ठीक पहले एक हिंदू युवक की निर्मम हत्या कर दी गई। 11 और 12 फरवरी की दरम्यानी रात मौलवीबाजार जिले के एक चाय बागान से 28 वर्षीय युवक का खून से सना शव बरामद हुआ। मृतक की पहचान रतन शुभ कर के रूप में हुई है। यह वारदात ऐसे समय में हुई है जब देश में चुनाव को लेकर पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

चम्पारा चाय बागान में मिला शव


यह घटना कमलगंज उपजिला के चम्पारा चाय बागान के बोरो लाइन सेक्शन की है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, 11 फरवरी की रात बागान के एक हिस्से में युवक का शव पड़ा मिला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मृतक के हाथ और पैर रस्सी से बंधे हुए थे। शरीर पर कई गहरे घाव थे और पूरा शरीर खून से लथपथ था। शुरुआती जांच में मामला हत्या का प्रतीत हो रहा है। फिलहाल पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

उसी बागान में मजदूरी करता था रतन

रतन शुभ कर इसी चाय बागान में मजदूरी करते थे। उनके पिता शुकता शुभकर भी लंबे समय से वहीं काम कर रहे हैं। परिवार और स्थानीय लोग इस घटना से स्तब्ध हैं। शव को सबसे पहले बागान के कुछ कर्मचारियों ने देखा, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

चूंकि रतन हिंदू समुदाय से थे, इसलिए इस घटना को अल्पसंख्यकों पर हमले के रूप में भी देखा जा रहा है। चुनाव से पहले अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के खिलाफ हमलों की खबरें पहले भी सामने आ चुकी हैं। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस हत्या के पीछे किसी राजनीतिक या सांप्रदायिक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जांच एजेंसियां हर एंगल से मामले की पड़ताल कर रही हैं।

इससे पहले भी हुई थी हत्या

यह पहली घटना नहीं है। इससे कुछ दिन पहले, 9 फरवरी को भी एक और हत्या की खबर आई थी। मयमनसिंह जिले के त्रिशाल उपजिला में 62 वर्षीय सुशेन चंद्र सरकार की हत्या कर दी गई थी। वह पेशे से चावल व्यापारी थे और बोगार बाजार चौराहे पर ‘भाई भाई एंटरप्राइज’ नाम से उनकी दुकान थी।

रिपोर्ट के अनुसार, रात करीब 11 बजे कुछ अज्ञात हमलावर दुकान में घुसे और धारदार हथियार से उन पर हमला कर दिया। हमलावरों ने न सिर्फ उनकी हत्या की बल्कि दुकान से लाखों टका लूटकर फरार हो गए। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने दुकान का शटर बाहर से बंद कर ताला लगा दिया, ताकि घटना का तुरंत पता न चल सके।

जब देर रात तक सुशेन चंद्र घर नहीं लौटे तो परिवार को चिंता हुई। परिजन दुकान पहुंचे और शटर खोलने पर अंदर उनका खून से लथपथ शव मिला। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि हत्या के लिए कुल्हाड़ी जैसे हथियार का इस्तेमाल किया गया था।

बढ़ती घटनाओं से बढ़ी चिंता


चुनाव से पहले हुई इन घटनाओं ने अल्पसंख्यक समुदाय में भय का माहौल पैदा कर दिया है। हालांकि प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है, लेकिन लगातार सामने आ रही हिंसक वारदातों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब सबकी नजर जांच एजेंसियों पर है कि वे इन मामलों में कितनी तेजी से कार्रवाई करती हैं और दोषियों को कब तक कानून के कटघरे में लाया जाता है। चुनावी माहौल में शांति और सुरक्षा बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।