टाइटैनिक जहाज हादसा, 1537 में से मिल पाई केवल 306 लोगों की लाशें, जानें इससे जुड़े रोचक तथ्यों के बारे मे

आप सभी ने टाइटैनिक जहाज के हादसे के बारे में तो सुना ही होगा और इस पर बनी हॉलीवुड फिल्म भी देखी होगी। इस फिल्म में टाइटैनिक जहाज के हादसे की कहानी बताई गई थी कि किस तरह सभी ओर खौफ का मंजर था। टाइटैनिक जहाज इस हादसे में पूरी तह तबाह हो गया था और इसका मलबा ढूँढने में भी 73 साल लग गए थे। आज हम आपको टाइटैनिक जहाज से जुड़े रोचक तथ्यों की जानकारी देने जा रहे हैं जो आपको हैरान कर देगी। तो आइये जानते हैं टाइटैनिक जहाज से जुड़े रोचक तथ्यों के बारे मे।

- टाइटैनिक अपने समय का दुनिया का सबसे बड़ा समुंद्री जहाज़ था। यह उस समय इंसान द्वारा बनाई गई सबसे बड़ी चीज़ थी।

- टाइटैनिक जहाज़ को 31 मार्च, 1909 को तीन हज़ार लोगों की टीम ने बनाना शुरू किया और सिर्फ 26 महीनों में यानि कि 31 मई, 1911 तक इसे बना डाला। यह जहाज़ तीन फुटबाल के मैदानों जितना बड़ा था और 31 मई 1911 को इसे देखने के लिए एक लाख से ज्यादा लोग आए थे।

- Titanic की डेकोरेशन और चिमनियां लगाने का काम अप्रैल 1912 तक चलता रहा और इसी महीने इसे अपनी पहली (और आख़री) यात्रा के लिए जाना था।

- टाइटैनिक 10 अप्रैल 1912 को इंग्लैंट के साउथम्टन (Southampton) से न्युयार्क की ओर रवाना हुआ। चार दिन सब ठीक – ठाक चलता रहा, पर 14 अप्रैल 1912 को रात 11 बज कर 40 मिनट पर यह एक हिमपर्वत (Iceberg) से टकरा गया और इसके निचने हिस्सों में पानी भरना शुरू हो गया।

- जहाज़ के हिमपर्वत से टकराते ही जहाज़ पर खौफ़ का माहौल पैदा हो गया, पर संकट के समय में कुछ समझदार लोग आगे आए और उन्होंने लोगो को धैर्य बधाया। जहाज़ पर मौजूद लाइफबोटस से बच्चों और औरतो को सुरक्षित जहाज से उतारा जाने लगा।

- Iceberg से टक्कर के लगभग 2 घंटे 40 मिनट बाद यह जहाज पूरी तरह से समुंद्र में डूब गया। (रात 11:40 से 2:20 तक)

- एक अनुमान के अनुसार जहाज़ पर 3547 लोग सवार थे जिनमें से 2687 यात्री और 860 क्रू मेंबर्स थे। इनमें से 1537 लोग इस हादसे में अपनी जान गंवा बैठे।

- टाइटैनिक जहाज़ पर सिर्फ 20 लाइफबोटस ही थी, जो इसके केवल एक तिहाई लोगों को बचाने के लिए पर्याप्त थी, अगर जहाज़ पर ज्यादा लाइफबोटस होती तो शायद इतने लोगों की जान नही जाती।

- इस दुर्घटना में मरे सिर्फ 306 लोगों की लाशे ही मिल पाई थी।

- टाइटैनिक जिस पानी में डूबा था उसका तापमान -2 डिग्री सेल्सीयस था, जिसमें कोई भी व्यक्ति 15 मिनट से ज्यादा जिंदा नही रह सकता था।

- जहाज़ के धीरे-धीरे डूबने की खबर मिलने के बावजूद भी इसके म्यूजिशियन इसके डूबने के वक्त तक गाना बजाते रहे ताकि वो और कुछ समय बाद मरने जा रहे लोग अपने आखरी पलों को खुसी से बिता सकें।

- जहाज़ से टकराने वाला हिमपर्वत लगभग 100 फीट ऊँचा था। यह ग्रीनलैंड के गलेशियर से आया था।

- एक अनुमान के अनुसार टाइटैनिक से टकराने वाला हिमपर्वत 10,000 हज़ार साल पहले ग्रीनलैंड से अलग हुआ था, पर टक्कर के दो हफ़ते बाद ही यह नष्ट हो गया था क्योंकि टक्कर से हिमपर्वत को भी काफी नुकसान हुआ था।

- टाइटैनिक को हर दिन 600 टन कोयले की जरूरत होती थी। इसकी 860 क्रू मेंबर्स की टीम में से 176 का काम सिर्फ कोयले को भट्ठियों में डालना था। इस जहाज़ की चिमनियों से रोज़ाना 100 टन धुंआ निकलता था।

- Titanic की चार बड़ी – बड़ी चिमनियां थी, जिनमें से सिर्फ तीन से धुंआ निकलता था। चौथी चिमनी नकली थी और केवल जहाज़ का संतुलन बनाने के लिए लगाई गई थी।

- टाइटैनिक दुर्घटना उत्तरी अटलांटिक सागर में हुई थी, जहाज का मलबा ढूंढ़ने में 73 साल लग गए। काफी कोशिशों के बाद 1 सितंबर 1985 को टाइटैनिक का मलबा ढूंढ लिया गया।

- आपको जानकर हैरानी होगी की समुंद्र में टाइटैनिक जहाज के दो टुकड़े हुए पड़े है, दोनो टुकड़ों की आपस में दूरी लगभग 600 मीटर की है। इसके सिवाए इस मलबे के 5 किलोमीटर के दायरे में जहाज की कई और चीज़ों समेत लोगों की कई चीज़ें भी मिली जो इस जहाज में सफर कर रहे थे।

- खोजकर्ता आजतक इस बात पर एकमत नही है कि टाइटैनिक क्यों दो टुकड़ो में बट गया, पर यह बात ज्यादा मानी जाती है कि शायद समुंद्र की सतह पर ही एक तरफ दबाव बढ़ने से यह टूट गया था।

- टाइटैनिक पर कई फिल्में और डोक्युमेंट्रीज़ बन चुकी है, पर 1997 में बनी ‘Titanic‘ फ्लिम सबसे ज्यादा चर्चा में रही। इस फिल्म को बनाने का खर्च उस समय के हिसाब से टाइटैनिक जहाज़ को बनाने से भी 40 प्रतीशत ज्यादा आया था।

- आपको जानकर हैरानी होगी कि टाइटैनिक पर सवार बहुत से लोग ऐसे भी थे, जो इसमें यात्रा नही करने वाले थे। दरासल टाइटैनिक की मालिक कंपनी ‘White Star Line’ ने अपने दो समुंद्री जहाज़ों की यात्रा कोयले की कमी के कारण रद्द कर दी थी और उसके यात्रियों के टाइटैनिक में शिफ्ट कर दिया था।

- Titanic में फर्स्ट क्लास में सफर करने के लिए आज से करीब सौ साल पहले 4,350 डॉलर (करीब 2 लाख 70 हजार रुपए) चुकाने पड़ते थे। वहीं, सेकंड क्लास के लिए 1,750 डॉलर ( करीब 1 लाख रुपए) और थर्ड क्लास के लिए 30 डॉलर (करीब दो हजार रुपए) की रकम चुकानी पड़ती थी। आज के वक्त में डॉलर की कीमत को देखा जाए, तो एक यात्री को 50 लाख रुपए खर्च कर इसमें सफर करने का मौका मिलता।

- टाइटैनिक शिप में यात्रियों और क्रू मेंबर्स के खाने का अच्छा-खासा इंतज़ाम था। जहाज पर खाने के लिए 86,000 पाउंड मीट, 40,000 अंडे, 40 टन आलू, 3,500 पाउंड प्याज, 36,000 सेब के साथ कई तरह के खाने का सामान मौजूद था।

- टाइटैनिक की Maximum Speed 43 किलोमीटर प्रति घंटा थी।

- टाइटैनिक के निर्माण के दौरान 250 से ज्यादा लोगों को चोटें आई थी और दो लोग तो मारे भी गए थे।

- जहाज़ के 860 क्रू मेंबर्स में से सिर्फ 23 महिलाएं थी।

- Titanic जहाज़ पर 13 नए शादी-शुदा जोड़े अपना हनीमून मनाने के लिए आए थे।

- टाइटैनिक में लगी सीटी को 16 किलोमीटर दूर तक सुना जा सकता था।

- इस जहाज़ पर नौ कुत्ते भी सवार थे, पर इनमें से केवल दो ही इस हादसे में जिंदा बच पाए।