पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़ा एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रदेश की राजनीति और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अवैध निर्माण का विरोध करना एक बुजुर्ग को इतना भारी पड़ गया कि उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। आरोप है कि सत्ताधारी दल के एक पार्षद ने खुलेआम हिंसा का सहारा लेते हुए 81 वर्षीय बुजुर्ग की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उनकी मौत हो गई।
जानकारी के मुताबिक, यह घटना रविवार की है, जब इलाके में कथित गैर-कानूनी निर्माण को लेकर विवाद चल रहा था। इसी दौरान बुजुर्ग के बेटे ने निर्माण का विरोध किया, जिस पर उसके साथ मारपीट की गई। जब पिता ने बीच-बचाव कर अपने बेटे को बचाने की कोशिश की, तो हालात और बिगड़ गए। आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के पार्षद ने गुस्से में आकर बुजुर्ग पर हमला कर दिया।
आरोपों के अनुसार, नॉर्थ बैरकपुर नगरपालिका के वार्ड नंबर 23 से तृणमूल पार्षद रवींद्रनाथ भट्टाचार्य ने 81 वर्षीय तुलसी अधिकारी को लात मारी। इस हमले के बाद बुजुर्ग मौके पर ही गिर पड़े और बेहोश हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत बैरकपुर कैंटोनमेंट अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश और भय का माहौल बन गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पार्षद को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, रवींद्रनाथ भट्टाचार्य ने खुद पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और खुद को निर्दोष बताया है। इसके बावजूद, सरेआम सड़क पर हुई इस हिंसक घटना ने प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, मृतक के परिजनों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपी को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने बताया कि पार्षद को कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया जाएगा। जांच के दौरान सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल की जा रही है।
वहीं, मामले के तूल पकड़ने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने भी अपने स्तर पर सख्त कदम उठाया है। पार्टी ने आरोपी पार्षद रवींद्रनाथ भट्टाचार्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि हिंसा और कानून हाथ में लेने जैसी घटनाओं के लिए संगठन में कोई जगह नहीं है। इस घटना ने एक बार फिर सत्ता, दबंगई और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।