तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 लोकसभा सांसदों के कथित तौर पर अलग रुख अपनाने के बाद पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच सियासी तनाव और गहरा गया है। इस घटनाक्रम को लेकर टीएमसी सांसद कीर्ति आज़ाद ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिन सांसदों ने कथित तौर पर समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए थे, उनके ऊपर दबाव बनाया जा रहा है और कई तरह की परिस्थितियों में उन्हें प्रभावित किया जा रहा है। वहीं, एक नई सूची सामने आने के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है, जिसमें कहा जा रहा है कि बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को समर्थन पत्र सौंपा है।
कीर्ति आज़ाद ने आरोप लगाया कि जिन सांसदों ने शुरुआत में हस्ताक्षर करने से इनकार किया था, उनके आवासों पर दबाव की स्थिति बनी। उन्होंने दावा किया कि कुछ जगहों पर पुलिस की मौजूदगी के बीच राजनीतिक दबाव बनाया गया और कई सांसदों को मानसिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश हुई। उनके अनुसार, “कई सांसद ऐसे हैं जो पहले तैयार नहीं थे, लेकिन बाद में परिस्थितियों के चलते उन्होंने हस्ताक्षर किए।” उन्होंने यह भी दावा किया कि बापी हलदर जैसे सांसदों पर भी दबाव की बात सामने आ रही है और वे परिस्थितियों से प्रभावित हुए हैं।
मुस्लिम सांसदों को लेकर भी उठाए सवालकीर्ति आज़ाद ने अपने बयान में आगे कहा कि इस पूरी सूची में अलग-अलग समूहों के सांसद शामिल हैं और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि कुछ नाम ऐसे भी हैं जो अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं और उन्हें भी इस पूरे घटनाक्रम में शामिल किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि संख्या बल को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाई जा रही है, क्योंकि दो-तिहाई समर्थन हासिल करने का प्रयास चल रहा है।
उन्होंने मिताली बाग का उदाहरण देते हुए कहा कि कई सांसदों पर लगातार दबाव बनाया गया है और हालात ऐसे बनाए गए कि वे निर्णय बदलने को मजबूर हुए।
निशिकांत दुबे को लेकर सनसनीखेज आरोपइस पूरे मामले में सबसे बड़ा बयान भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को लेकर सामने आया है। कीर्ति आज़ाद ने दावा किया कि इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे रणनीति उनके घर से तय हो रही है। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार “निशिकांत दुबे के घर में मेरा एक व्यक्ति मौजूद है, जो लगातार अंदर की जानकारी देता है कि क्या चल रहा है और क्या निर्णय लिए जा रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि कई घटनाओं की जानकारी उसी स्रोत के जरिए उन्हें मिल रही है और पूरा घटनाक्रम वहीं से नियंत्रित हो रहा है। आज़ाद ने आगे आरोप लगाया कि कुछ सांसदों के घरों के आसपास भी गतिविधियां बढ़ी हैं और राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि निशिकांत दुबे एक मजबूत कारोबारी पृष्ठभूमि रखते हैं और राजनीतिक रणनीति में उनकी भूमिका को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। उनके अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है और इसमें कई स्तरों पर बातचीत और संपर्क शामिल हैं।
बागी सांसदों की सूची में बड़े नाम शामिलइस बीच सामने आई सूची में जिन सांसदों के नामों की चर्चा है, उनमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदर, डॉ. शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार माल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी और सायोनी घोष जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
इसके अलावा दूसरी सूची में खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मलिया और पार्थ भौमिक जैसे सांसदों के हस्ताक्षर होने की बात भी सामने आई है। राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि लगभग 20 सांसद अलग गुट बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं, और अब यह सूची सामने आने के बाद चर्चा और तेज हो गई है।
राज्यसभा में भी लगातार झटके, इस्तीफों का सिलसिला जारीलोकसभा के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस को राज्यसभा में भी लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों में पार्टी को चार बड़े इस्तीफों का सामना करना पड़ा है। इनमें सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव, कोयल मलिक और प्रकाश बरेक के नाम शामिल हैं, जिन्होंने अलग-अलग समय पर पार्टी से दूरी बना ली है।
सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में राज्यसभा में और भी इस्तीफे सामने आ सकते हैं, जिससे पार्टी की संसदीय स्थिति और कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हो रहे इन घटनाक्रमों से TMC के भीतर अस्थिरता और बढ़ सकती है और संगठनात्मक ढांचे पर इसका असर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।