कोलकाता। नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य की पूर्व तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के कार्यकाल में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हुई और चिकित्सा क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचा। उनका कहना था कि वर्तमान सरकार को अब उसी अव्यवस्था को सुधारने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
बुधवार सुबह कोलकाता के उत्तरी बाहरी क्षेत्र स्थित बिधाननगर अस्पताल में आयोजित नेशनल डॉक्टर्स डे कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सरकार की नीतियों का असर प्रशासन के लगभग हर विभाग में दिखाई देता है, लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को फिर से मजबूत और भरोसेमंद बनाना उनकी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
अपने संबोधन के दौरान सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र रॉय और दिवंगत मुख्यमंत्री ज्योति बसु का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1977 में सत्ता संभालने के बाद ज्योति बसु ने स्वीकार किया था कि विकास से जुड़े जिन कार्यों की वह शुरुआत करना चाहते थे, उनमें से अधिकांश की नींव डॉ. बिधान चंद्र रॉय पहले ही रख चुके थे। अधिकारी ने कहा कि आज जब उन्होंने मुख्यमंत्री का दायित्व संभाला है, तो उन्हें लगभग हर क्षेत्र में पिछली सरकार की नीतियों के कारण आई गिरावट को सुधारने का काम करना पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीते वर्षों में पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार उपेक्षा की गई, जिसके कारण अस्पतालों और चिकित्सा व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हुई। उनके अनुसार, स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस प्रकार की अनदेखी किसी भी राज्य के लिए उचित नहीं मानी जा सकती। उन्होंने कहा कि अब उनकी सरकार का लक्ष्य चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करना और लोगों का भरोसा दोबारा कायम करना है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि स्वास्थ्य व्यवस्था को राजनीतिक हस्तक्षेप से पूरी तरह मुक्त रखना आवश्यक है। उनका कहना था कि अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों का संचालन निष्पक्षता, पारदर्शिता और पेशेवर मानकों के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाई-भतीजावाद और पक्षपात के माहौल में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना संभव नहीं है, इसलिए सरकार इस दिशा में सुधारात्मक कदम उठा रही है।
सुवेंदु अधिकारी ने अपने संबोधन में मानवीय सेवा के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जो लोग ईश्वर में विश्वास रखते हैं, वे यह भी मानते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति में ईश्वर का अंश होता है। ऐसे में जरूरतमंदों की सेवा करना ही वास्तविक अर्थों में भगवान की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों का दायित्व केवल इलाज करना नहीं, बल्कि मानवता की सेवा करना भी है।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने भी मानव सेवा को ईश्वर की सेवा का सर्वोच्च माध्यम बताया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए सरकार व्यापक स्तर पर काम कर रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देश के बड़े अस्पतालों में पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए क्यों जाते हैं। उनके अनुसार, राज्य में ही ऐसी सुविधाएं विकसित होनी चाहिए, ताकि लोगों को बेहतर उपचार के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनावश्यक राजनीतिक दखल ने स्वास्थ्य तंत्र को कमजोर किया और इसका नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह स्थिति इसलिए भी दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि पश्चिम बंगाल के लोग अपनी प्रतिभा और क्षमता के बल पर राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। ऐसे राज्य को मजबूत स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलना चाहिए।
अपने संबोधन के अंत में सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की दिशा में पहला बड़ा कदम पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना को लागू करके उठाया। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार ने इस योजना को राज्य में लागू नहीं होने दिया था, जबकि वर्तमान सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है।