जादवपुर यूनिवर्सिटी विवाद पर भड़के शुभेंदु अधिकारी, बोले- ‘कश्मीर की आजादी’ के नारे लगे तो गांधीजी की नहीं, नेताजी की...

जादवपुर यूनिवर्सिटी को लेकर पश्चिम बंगाल में चल रहे सियासी विवाद के बीच शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर यूनिवर्सिटी परिसर में ‘कश्मीर मांगे आजादी’ जैसे नारे लगाए गए तो वह महात्मा गांधी की नहीं, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भाषा में जवाब देंगे। अधिकारी ने राष्ट्रविरोधी ताकतों के समर्थकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत बताई।

विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान अधिकारी ने कहा कि जादवपुर यूनिवर्सिटी को 1,300 करोड़ रुपये का अनुदान मिलेगा, लेकिन भारत को तोड़ने की बात करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने ऐसे लोगों के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाने की बात कही।

यूनिवर्सिटी स्टाफ के तबादले से जुड़ा संशोधन बिल पेश

मुख्यमंत्री ने टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ को एक यूनिवर्सिटी से दूसरे संस्थान में ट्रांसफर की सुविधा देने वाले संशोधन बिल को भी विधानसभा में पेश किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून के तहत तथाकथित पंडितों को नए बने संस्थानों में भेजा जाएगा, जिससे उन्हें लाभ मिलेगा।

अधिकारी के मुताबिक, इस कानून का उद्देश्य यूनिवर्सिटी और सरकार के बीच स्वायत्तता तथा जवाबदेही का संतुलन बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि बिल के प्रावधानों से PhD सुपरविजन और प्रोजेक्ट्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि जो कर्मचारी या अधिकारी प्रस्तावित कानून के प्रावधानों से खुश नहीं हैं, वे नौकरी छोड़ सकते हैं।
पूर्व वीसी गोपाल सेन की हत्या की जांच का भी जिक्र

जादवपुर यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर गोपाल सेन की 1970 में हुई हत्या का मुद्दा भी अधिकारी के बयान में उठा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर सरकार इस घटना की जांच के लिए एक पैनल का गठन कर सकती है।

धीरेंद्र शास्त्री के बयान और विरोध-प्रदर्शन पर भी बोले

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के मांस से जुड़े बयान को लेकर हुए विवाद पर भी मुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह कोलकाता पुलिस कमिश्नर को निर्देश देंगे कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के हालिया विरोध-प्रदर्शन के दौरान धर्मगुरु की तस्वीरें जलाने वालों को गिरफ्तार किया जाए।

जादवपुर यूनिवर्सिटी में झड़प के बाद बढ़ा विवाद


जादवपुर यूनिवर्सिटी में पिछले दिनों वामपंथी छात्र संगठनों और RSS से जुड़े ABVP के बीच झड़प हुई थी। इसके बाद यूनिवर्सिटी को लेकर अधिकारी लगातार आक्रामक रुख अपनाते नजर आए हैं।

बुधवार को उन्होंने गोलपार्क से करीब 3 किलोमीटर लंबी ‘गेरुआ सम्मान यात्रा’ यानी केसरिया सम्मान मार्च का नेतृत्व किया। मार्च के बाद उन्होंने कैंपस के बाहर 8B बस स्टैंड पर लोगों को संबोधित किया। इसी दौरान उन्होंने यूनिवर्सिटी में लगाए जाने वाले कथित नारों और राष्ट्रविरोधी ताकतों को लेकर अपना सख्त रुख सामने रखा।

जादवपुर यूनिवर्सिटी को लेकर चल रहे इस विवाद में अब राजनीतिक बयानबाजी के साथ यूनिवर्सिटी के प्रशासन, कर्मचारियों के तबादले और पुराने मामलों की जांच जैसे मुद्दे भी सामने आ गए हैं।