पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उठापटक के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार उनकी पार्टी और नेताओं को निशाना बना रही है, लेकिन वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं। एक वीडियो संदेश जारी करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि यदि कोई उन्हें खामोश करना चाहता है, तो उसे उनकी जान लेनी होगी। इस दौरान उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर भी जमकर निशाना साधा और उन पर जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया।
टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने ममता बनर्जी का यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस के तीन पूर्व सांसद पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इतना ही नहीं, भाजपा ने इन नेताओं को आगामी उपचुनाव के लिए उम्मीदवार भी घोषित कर दिया है, जिससे बंगाल की सियासत और गर्मा गई है।
भाजपा पर प्रताड़ना और दबाव बनाने का आरोपअपने वीडियो संदेश में ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस को कमजोर करने और उसके नेताओं को डराने-धमकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि उनकी आवाज दबाने के लिए हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन वह पीछे हटने वाली नहीं हैं।
उन्होंने कहा, अगर मुझे चुप कराना है तो मेरी हत्या करनी होगी। आपने मुझे रोकने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन मैं डरने वाली नहीं हूं। ममता ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को राजनीतिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उन्हें बदनाम करने की कोशिश की गई।
उन्होंने महुआ मोइत्रा, अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी जैसे नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा ने लगातार उनके खिलाफ कार्रवाई की। ममता ने यह भी आरोप लगाया कि उनके आवास को भी निशाना बनाया गया और पार्टी को अस्थिर करने की लगातार कोशिशें की गईं।
हिरासत में नेताओं के साथ अमानवीय व्यवहार का लगाया आरोपटीएमसी प्रमुख ने अपनी पार्टी के गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ कथित व्यवहार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हिरासत में बंद नेताओं के साथ मानवीय गरिमा के विपरीत व्यवहार किया जा रहा है।
ममता बनर्जी ने दावा किया कि उनके कई सहयोगियों को लॉक-अप में फर्श पर सोने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों की कमर में रस्सी बांधकर और पैरों में बेड़ियां लगाकर घुमाया गया, जबकि कुछ नेताओं के सिर तक मुंडवा दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ के साथ ऐसा अपमानजनक व्यवहार किया गया, जिसका सार्वजनिक रूप से उल्लेख करना भी उचित नहीं है।
बागी नेताओं को साफ संदेश, 'निर्णय लें और भ्रम फैलाना बंद करें'अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर भी खुलकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राजनीति में विश्वास सबसे बड़ी पूंजी होती है और जो लोग जनता तथा पार्टी के भरोसे को तोड़ते हैं, उन्हें अपना रास्ता स्पष्ट कर देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जो नेता तृणमूल कांग्रेस में रहते हुए भाजपा के लिए काम कर रहे हैं, वे भ्रम की स्थिति खत्म करें। ममता ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि किसी को पार्टी छोड़नी है तो वह खुलकर भाजपा में शामिल हो जाए, लेकिन तृणमूल कांग्रेस में रहकर दोहरी राजनीति न करे।
उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा, जो लोग खेल खेल रहे हैं, वे अपना फैसला कर लें। या तो तृणमूल कांग्रेस के साथ पूरी निष्ठा से काम करें या फिर सीधे भाजपा में चले जाएं। बीच का रास्ता अपनाने से किसी का भला नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को गुमराह करना बंद किया जाना चाहिए।
भाजपा ने पूर्व टीएमसी नेताओं को बनाया उम्मीदवारगौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस को कई बड़े झटके लगे हैं। पार्टी के कई सांसद, विधायक और वरिष्ठ नेता बागी खेमे में शामिल हो चुके हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं।
इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने 24 जुलाई को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व सांसद सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। तीनों नेताओं ने भाजपा का दामन थामने के कुछ ही घंटों बाद टिकट हासिल कर लिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन घटनाक्रमों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। अब सभी की नजर 24 जुलाई को होने वाले उपचुनाव पर टिकी है, जब इन सीटों के लिए मतदान और उसी दिन मतगणना भी होगी। चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि राज्य की बदलती राजनीतिक तस्वीर किस दिशा में आगे बढ़ती है।