सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद गिराए जाने के मामले ने राजनीतिक विवाद बढ़ा दिया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे संविधान और कानून के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि मस्जिद को गिराने से पहले उनकी पार्टी के नेताओं ने अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन जानकारी देने के बावजूद कार्रवाई रोक नहीं पाई।
इमरान मसूद ने कहा कि वह इस मामले को कानूनी तरीके से आगे ले जाएंगे और जरूरत पड़ने पर हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने मस्जिद के पुराने होने और जमीन के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज होने का भी दावा किया।
मस्जिद की उम्र और मालिकाना हक पर उठाए सवालकांग्रेस सांसद के मुताबिक, मस्जिद 1911 से पहले की है और इसके मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज वहीद खान और याकूब खान के नाम बताए गए हैं। उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि आदेश में 30 दिन का समय दिया गया था और 24 तारीख को इस मामले में स्टे भी हो गया था। उनके अनुसार, इसके बावजूद आदेश के तहत कार्रवाई की गई, जबकि 22 दिन की अवधि बाकी थी।
मसूद ने मस्जिद की जमीन के टाइटल को लेकर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि केवल खसरे के आधार पर जमीन के टाइटल का निर्धारण नहीं किया जा सकता, क्योंकि खसरा मौजूदा स्थिति से संबंधित जानकारी देता है।
हाई कोर्ट की प्रक्रिया पर भी सवालइमरान मसूद ने हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान कुछ कानूनी पहलुओं को नजरअंदाज किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड को मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया और लिमिटेशन एक्ट से जुड़े पहलुओं पर भी विचार नहीं किया गया।
उन्होंने वक्फ बाय यूजर के प्रावधान का भी उल्लेख किया। मसूद के अनुसार, पुराने मामलों में इस प्रावधान की प्रासंगिकता पर विचार किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि वक्फ से जुड़े नए कानून पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में वह खुद भी शामिल रहे हैं।
रात में घेराबंदी के बाद कार्रवाई का आरोपमस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई के तरीके पर भी कांग्रेस सांसद ने सवाल उठाए। उनका दावा है कि इलाके को रात में चारों तरफ से घेर लिया गया था। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के एमएलसी और अन्य कार्यकर्ता पूरी रात अधिकारियों से संपर्क करने और मौके पर मौजूद रहने की कोशिश करते रहे।
मसूद के अनुसार, इलाके की घेराबंदी के दौरान लोगों को उनके घरों में रहने के लिए मजबूर किया गया और इसके बाद मस्जिद को गिरा दिया गया।
‘यह सिर्फ मस्जिद का मामला नहीं’इमरान मसूद ने इस घटना को केवल एक धार्मिक स्थल से जुड़ा विवाद मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार यह संविधान और कानून के पालन का भी सवाल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मामले में कानूनी रास्ता अपनाएगी और उच्च अदालतों में कार्रवाई को चुनौती देगी।
उन्होंने सरकार को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई को राजनीतिक एजेंडे के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, ये आरोप इमरान मसूद के हैं।
सहारनपुर के लोगों से विरोध की अपील
कांग्रेस सांसद ने सहारनपुर के लोगों से भी इस कार्रवाई के विरोध की अपील की। उन्होंने इसे शहर के लिए ‘काला दिन’ बताते हुए लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने की बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले में लड़ाई कानून के दायरे में रहकर ही लड़ी जाएगी।
मसूद ने यह भी कहा कि किसी धर्मस्थल को गिराए जाने से किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति को खुश नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे समाज और संविधान से जुड़े व्यापक सवाल के तौर पर पेश किया।
‘आखिरी दम तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगे’इमरान मसूद ने दोहराया कि वह इस मामले में कानून के रास्ते से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि उच्च अदालत में जाने का समय और मौलिक अधिकार सभी के लिए महत्वपूर्ण हैं और इस मामले में संबंधित पक्षों को जवाब देना होगा।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी कानून को अपने हाथ में लेने के बजाय कानूनी प्रक्रिया के जरिए मामले को आगे बढ़ाएगी और जहां तक जरूरत होगी, अदालत में चुनौती दी जाएगी।