अयोध्या: राम मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़ी भर्ती प्रक्रिया को लेकर अब कई गंभीर सवाल सामने आने लगे हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि मंदिर परिसर के विभिन्न विभागों में कार्यरत कई कर्मचारियों को पुलिस सत्यापन (पुलिस वेरिफिकेशन) कराए बिना ही नियुक्त कर दिया गया था। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए चढ़ावे की गिनती जैसे बेहद संवेदनशील कार्य में लगे कर्मचारियों का भी नियुक्ति से पहले पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया था। अब जांच तेज होने के बाद पांच कर्मचारी पुलिस वेरिफिकेशन में असफल पाए गए हैं, जिसके बाद उन्हें तत्काल सेवा से हटा दिया गया है।
दो वर्षों से कर रहे थे संवेदनशील जिम्मेदारी का निर्वहनजांच में सामने आया है कि हटाए गए कर्मचारी पिछले करीब दो वर्षों से चढ़ावे की गिनती से जुड़े कार्य में लगे हुए थे। पुलिस सत्यापन में खामियां मिलने के बाद उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। सूत्रों के अनुसार, कुछ अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। कर्मचारियों की छंटनी के बाद शुक्रवार को गणना कक्ष में केवल 12 कर्मचारी ही कार्य करते नजर आए। जैसे-जैसे राम जन्मभूमि परिसर में जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे भर्ती प्रक्रिया में मानकों की अनदेखी के नए तथ्य सामने आ रहे हैं। विशेष रूप से दान राशि की गिनती जैसे महत्वपूर्ण कार्य में निगरानी, संचालन और भर्ती प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही के संकेत मिले हैं। जांच अधिकारियों को इसके पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त हुए हैं और इनका उल्लेख प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में भी किया गया है। इसी के चलते अब चढ़ावा गणना से जुड़े सभी कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन तेजी से कराया जा रहा है।
एक-एक कर्मचारी का शुरू हुआ सत्यापन अभियानकुछ दिन पहले कम वेतन और कार्य अवधि बढ़ाए जाने से नाराज होकर 23 कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद केवल 13 कर्मचारी ही गणना कार्य में बचे थे। हालांकि बाद में इस्तीफा देने वाले दो कर्मचारी वापस लौट आए, जिससे संख्या बढ़कर 15 हो गई। इसी बीच पहले से कार्यरत दो कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद उन्हें तत्काल कार्यमुक्त कर दिया गया। जांच अधिकारियों को संदेह होने पर सभी कर्मचारियों का क्रमवार पुलिस सत्यापन शुरू कराया गया। इस प्रक्रिया के दौरान तीन और कर्मचारी जांच में असफल पाए गए। इस तरह कुल पांच कर्मचारी, जो पिछले दो वर्षों से दान राशि की गणना कर रहे थे, सेवा से हटा दिए गए। फिलहाल गणना कक्ष में केवल 12 कर्मचारी ही नोटों और सिक्कों की गिनती का कार्य संभाल रहे हैं।
इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों का भी हो रहा पुलिस सत्यापनआगामी सावन मेले को देखते हुए मंदिर प्रशासन गणना कक्ष में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में नियुक्ति करने वाली निजी एजेंसी पहले उन कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही है, जिन्होंने हाल ही में इस्तीफा दिया था, क्योंकि उन्हें इस कार्य का पूर्व अनुभव है। हालांकि इस बार किसी भी कर्मचारी को बिना पुलिस सत्यापन के नियुक्त नहीं किया जाएगा। व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से इस्तीफा दे चुके कर्मचारियों का भी पुलिस सत्यापन कराया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रक्रिया में भी कई ऐसे कर्मचारी मिले हैं जिनके खिलाफ पहले से पुलिस मामले दर्ज हैं। अब केवल वही अभ्यर्थी नियुक्त किए जाएंगे, जो सत्यापन प्रक्रिया में पूरी तरह सफल होंगे। मंदिर प्रशासन भर्ती प्रक्रिया को निर्धारित मानकों के अनुरूप और अधिक सख्ती के साथ लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।