अमेरिका के टैरिफ पर बोलीं मायावती – मोदी सरकार को इस चुनौती को आत्मनिर्भरता में बदलने की जरूरत

अमेरिका द्वारा भारत पर नए टैरिफ थोपे जाने के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस आर्थिक दबाव को अवसर में बदला जाए और देश की अर्थव्यवस्था को किसी भी प्रकार की क्षति से बचाया जाए।

मायावती ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “'मित्र देश' कहे जाने के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय आयात पर 1 अगस्त से 25 प्रतिशत शुल्क लगाने का फैसला लिया है। इसके साथ ही रूस से तेल की खरीद पर पेनाल्टी लगाने की चेतावनी भी एक नई आर्थिक चुनौती बनकर सामने आई है। इस स्थिति में केंद्र सरकार को चाहिए कि वह इस कठिनाई को आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम बनाकर भारतीय अर्थव्यवस्था की रक्षा करे।”

सरकार को निभाना होगा अपना वादा: मायावती

मायावती ने यह भी कहा कि सरकार ने देश को भरोसा दिलाया है कि किसानों, लघु और मध्यम उद्योगों तथा राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं होगा। ऐसे में अब वक्त है कि सरकार इस विश्वास को सच करके दिखाए और अपने वादों पर खरी उतरे।

उन्होंने आगे कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहाँ बहुसंख्यक आबादी गरीबों और मेहनतकश वर्ग से आती है। अगर हर हाथ को रोजगार देने की नीयत से सही नीति बनाई जाए और उसका ईमानदारी से पालन हो, तो भारत न केवल आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की भावना को साकार करते हुए एक खुशहाल और समृद्ध राष्ट्र बन सकता है। यह संविधान के मानवीय और कल्याणकारी उद्देश्यों के अनुरूप भी होगा और देशहित को सुरक्षित रखेगा।

अखिलेश यादव का हमला – ‘यह भारत के बुरे दिन की शुरुआत’

उधर, अमेरिका के इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने का प्रयास शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखा हमला करते हुए कहा कि यह भारत के बुरे दिनों की शुरुआत है।

उन्होंने कहा, “ग्यारह साल से भारत-अमेरिका दोस्ती की बातें की जा रही थीं। आखिर उस दोस्ती का नतीजा क्या निकला? आज जब ऐसा संकट सामने है, तो उन दावों का क्या हुआ?” अखिलेश के बयान ने यह साफ कर दिया कि विपक्ष इसे एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में भुनाने की तैयारी में है।