‘24 में हराया, ‘27 में हटाएंगे’, केशव प्रसाद मौर्य के अवध-मगध वाले बयान पर अखिलेश यादव का करारा पलटवार

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम और भाजपा नेता केशव प्रसाद मौर्य के हालिया बयान पर कड़ा जवाब दिया है। अखिलेश ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर लिखा कि लगता है लखनऊवालों से मुकाबला करने के चक्कर में किसी और ने भी नाम बदलने की तकनीक सीख ली है। उन्होंने कहा कि ‘चुनाव आयोग’ को ‘विकास’ में बदलकर अपनी जुगाड़ वाली जीत का आधार बता रहे हैं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि जो लोग पिछले चुनाव में खुद हार गए थे, अब वही आगे की जीत का दावा कर रहे हैं। उनके शब्दों में, “’24 में हराया था, ’27 में हटाएंगे और अपनी ‘पीडीए सरकार’ बनाएंगे।”

केशव प्रसाद मौर्य का बयान

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद, एनडीए के सह-प्रभारी और यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पहले ही यह दावा किया था कि 2010 का रिज़ल्ट दोहराएगी और जनता ने एनडीए को भारी समर्थन देकर इसे साबित कर दिया। मौर्य ने लिखा, “विकसित बिहार, मोदी जी के नेतृत्व में हम बनाएंगे।”

केशव ने लोकतंत्र को पवित्र यज्ञ बताते हुए विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि विपक्ष घुसपैठियों को अपना वोट बैंक मानता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब न तो जंगलराज, न कट्टा राज, न घोटाला, और न ही कोई फर्जी PDA चलेगा। इस बार जनता ने एनडीए को स्पष्ट आशीर्वाद दिया।

मौर्य ने बिहार चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाने वाले पांच नेताओं को पांडव बताया। उनके अनुसार, मोदी, नीतीश कुमार, चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा इस चुनाव में निर्णायक रहे।
अखिलेश यादव का पलटवार

अखिलेश यादव ने मौर्य के बयान पर कड़ा पलटवार किया और कहा कि जनता इस तरह की बयानबाज़ी को गंभीरता से नहीं लेती। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं, उनके दिन गिने हुए हैं।

अखिलेश ने यह भी कहा कि “आने वाले चुनाव में तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की तरह मैं भी हार जाऊंगा”, यह संकेत मौर्य द्वारा लगाए गए आरोपों और विपक्ष पर किए गए निशानों का जवाब है।

राजनीतिक तनाव और बयानबाज़ी

केशव प्रसाद मौर्य और अखिलेश यादव के बीच यह बयानबाज़ी उत्तर प्रदेश और बिहार की सियासी रणनीति और आगामी चुनावों की दिशा को दर्शाती है। दोनों ही नेता सोशल मीडिया और पब्लिक रैलियों के माध्यम से जनता तक संदेश पहुँचाने में सक्रिय हैं।

राजनीतिक विश्लेषक इसे अगले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तैयारी के रूप में देख रहे हैं, जिसमें भाजपा और सपा दोनों ही अपने समर्थकों को लामबंद कर रहे हैं।