‘कालनेमी’ टिप्पणी पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा पलटवार, सीएम योगी पर लगाए गंभीर आरोप

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘कालनेमी’ वाले बयान को लेकर संत समाज और राजनीति में हलचल तेज हो गई है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर कड़ा एतराज जताते हुए खुलकर प्रतिक्रिया दी है। शंकराचार्य का कहना है कि अब यह देश की जनता समझ चुकी है कि असल ‘कालनेमी’ कौन है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि एक तरफ वे खुद फुटपाथ पर बैठे हैं, जबकि दूसरी तरफ मुख्यमंत्री सत्ता की राजगद्दी संभाले हुए हैं।

यह पूरा विवाद माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के स्नान को लेकर शुरू हुआ था, जो अब असली-नकली संत, सनातन धर्म और प्रशासनिक रवैये तक पहुंच चुका है। शंकराचार्य मौनी अमावस्या से ही संगम तट पर धरने पर बैठे हैं और उन्होंने बसंत पंचमी के स्नान से भी दूरी बनाने का ऐलान कर दिया है।

‘मेरे साथ अपराध हुआ, बयानबाजी नहीं जवाबदेही चाहिए’

सीएम योगी के बयान पर पलटवार करते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने तीखे शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री को बयानवीर बनने के बजाय सच्चाई का संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके साथ अपराध हुआ है और उसकी जांच होनी चाहिए। शंकराचार्य का आरोप है कि उनके खिलाफ जारी नोटिस के पीछे दुर्भावनापूर्ण सोच साफ झलकती है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी की स्थिति खुद अधिकारियों के कारण उलझी हुई है और प्रशासन ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा है। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि 12 साल सत्ता में रहने के बावजूद सरकार कई मुद्दों पर विफल रही है, जिनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने दो टूक कहा कि अब जनता यह समझ चुकी है कि कालनेमी कौन है और कौन धर्म की आड़ में राजनीति कर रहा है।

‘हम फुटपाथ पर बैठे हैं, वो सत्ता सुख भोग रहे हैं’

मेला प्रशासन के रवैये को लेकर भी शंकराचार्य ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि वे पिछले 40 वर्षों से माघ मेले में आते रहे हैं और पहले प्रशासन की ओर से शिविर की व्यवस्था की जाती थी। अब स्थिति यह है कि अगर प्रशासन चाहे तो शिविर उखाड़ कर फेंक दे, क्योंकि वे पहले से ही सड़क किनारे बैठे हैं।

सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नकली और असली सनातन की बात कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि संत किसी प्रकार का सुख नहीं भोग रहा और सत्ता का सुख मुख्यमंत्री को मिल रहा है। शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि केवल कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर देने से वे संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

मेला प्रशासन का नोटिस बना विवाद की जड़

यह विवाद 18 जनवरी को उस समय भड़का, जब मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले में शंकराचार्य की पालकी को स्नान के लिए आगे बढ़ने से रोक दिया गया। स्थिति बिगड़ने पर मेला प्रशासन ने उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा और नोटिस चिपका दिया। इसके बाद दूसरा नोटिस भी जारी किया गया, जिसमें बैरियर तोड़ने और भीड़ में जबरन बग्घी ले जाने के आरोप लगाए गए।

नोटिस में यह भी पूछा गया कि क्यों न शंकराचार्य को हमेशा के लिए माघ मेले से प्रतिबंधित कर दिया जाए। प्रशासन ने चेतावनी दी कि 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब न मिलने पर संस्था को आवंटित भूमि और अन्य सुविधाएं वापस ली जा सकती हैं।

‘संत की निजी संपत्ति कुछ नहीं होती’—सीएम योगी का बयान

इस विवाद से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज से करीब 720 किलोमीटर दूर सोनीपत में संतों के कर्म और धर्म को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि एक योगी, संन्यासी और संत के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता। उनके अनुसार, संत की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती, बल्कि धर्म ही उसकी संपत्ति और राष्ट्र उसका स्वाभिमान होता है।

सीएम योगी ने यह भी कहा था कि जो लोग धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं, ऐसे कई ‘कालनेमी’ समाज में मौजूद हैं और उनसे सतर्क रहने की जरूरत है।

डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने की शंकराचार्य से अपील

इस पूरे विवाद के बीच उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के चरणों में प्रणाम है और उनसे आग्रह है कि वे स्नान करें और इस मुद्दे को समाप्त करें।

आजमगढ़ में दिए बयान में केशव मौर्य ने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सपा से जुड़े लाल टोपी और जालीदार टोपी वाले अब पूरी तरह गायब हो चुके हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनावों में भाजपा का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है।