बरेली के पूर्व भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पार्टी के भीतर और स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को तेज कर दिया है। राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची सामने आने के बाद कश्यप ने अपने फेसबुक अकाउंट पर सिर्फ “टाटा बाय-बाय” लिखा। पोस्ट सामने आते ही उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई। कुछ समर्थक और कार्यकर्ता उनके आवास तक पहुंचे, जबकि उनके फोन पर भी लगातार संपर्क किए जाने की बात सामने आई।
राज्यसभा की सूची के बाद सामने आई पोस्टधर्मेंद्र कश्यप का नाम राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में नहीं होने के बाद उनकी पोस्ट को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि वह भाजपा से अलग होने पर विचार कर सकते हैं और भविष्य में किसी दूसरे राजनीतिक दल का रुख कर सकते हैं। समाजवादी पार्टी या किसी अन्य प्रमुख दल के शीर्ष नेतृत्व से उनकी संभावित मुलाकात को लेकर भी चर्चाएं हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने अभी किसी दूसरी पार्टी में जाने की औपचारिक घोषणा नहीं की है। कश्यप की पोस्ट के बाद उनके समर्थकों के बीच भी नाराजगी के स्वर दिखाई दिए। कुछ समर्थकों ने सोशल मीडिया पर भाजपा नेतृत्व पर अनदेखी का आरोप लगाया। एक समर्थक की ओर से यह तक कहा गया कि पहले से मंत्री पद पर रह चुके लोगों को दोबारा राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया, जबकि जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं की अनदेखी हुई। इसी पोस्ट में 2027 के विधानसभा चुनाव में बरेली की सभी नौ विधानसभा सीटों पर पार्टी को नुकसान होने की आशंका भी जताई गई। यह समर्थक की राय थी, धर्मेंद्र कश्यप का आधिकारिक बयान नहीं।
बेटी कीर्ति कश्यप को राजनीति में आगे बढ़ाने की कोशिशधर्मेंद्र कश्यप मूल रूप से कंधरापुर के रहने वाले हैं और लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं। बताया गया कि वह अपनी बेटी कीर्ति कश्यप को भी राजनीति में आगे बढ़ाने के प्रयास कर रहे थे। चर्चा थी कि राज्यसभा के लिए उनकी बेटी की दावेदारी को लेकर भी प्रयास किए जा रहे थे।
राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद टिकट नहीं मिलने से कश्यप के समर्थकों के बीच निराशा की चर्चा शुरू हुई। इसी घटनाक्रम के बाद उनकी फेसबुक पोस्ट सामने आई, जिसके बाद उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें तेज हो गईं।
बसपा से शुरू हुआ राजनीतिक सफर, सपा और फिर भाजपा में पहुंचेधर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। वर्ष 2002 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक के रूप में अपनी राजनीतिक पारी शुरू की। इसके बाद 2003 में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और राज्य मंत्री बने।
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने आंवला लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, जहां भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी के हाथों उन्हें मामूली अंतर से हार मिली। इसके बाद वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। भाजपा के टिकट पर धर्मेंद्र कश्यप ने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की और सांसद बने। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नीरज मौर्य से 15,970 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में हार के बाद से वह अपनी बेटी को राजनीति में आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय बताए जाते रहे हैं। राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में नाम नहीं आने के बाद उनके अगले कदम को लेकर अब राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।
शेर के जरिए भी जाहिर की अपनी बात'टाटा-बाय-बाय' पोस्ट के बाद धर्मेंद्र कश्यप ने एक शेर के जरिए भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा—
“आंखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा, कश्ती के मुसाफिर ने कभी समंदर नहीं देखा। जब से चला हूं मंजिल पर मेरी निगाहें हैं, कभी मील का पत्थर नहीं देखा।”
इसके बाद उन्होंने अपने समर्थकों की संख्या और उनके साथ बैठक करने की बात कही। कश्यप ने कहा कि अब समर्थकों के साथ बैठक की जाएगी और उनसे राय लेने के बाद आगे का फैसला होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही बैठक बुलाई जा रही है और उसके बाद जो निर्णय होगा, वह सभी के सामने आ जाएगा।
'राज्यसभा से मेरा कोई मतलब नहीं'धर्मेंद्र कश्यप ने राज्यसभा टिकट को लेकर कहा कि उनका राज्यसभा से कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि टिकट जहां से चाहेंगे, वहां से मिलेगा और समर्थकों की बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए उन लोगों को लेकर भी नाराजगी जताई, जिन्होंने चुनाव के दौरान खुलकर उनका विरोध किया था। कश्यप ने कहा कि अगर ऐसे लोग पार्टी में आगे की पंक्ति में बैठेंगे तो उन्हें स्वाभाविक रूप से कष्ट होगा।
उन्होंने कहा कि अगर पार्टी ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी और इस पर चिंता व्यक्त नहीं करेगी, तो उनके जैसे व्यक्ति के लिए “टाटा-बाय-बाय” कहना स्वाभाविक है। कश्यप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह केवल लोकसभा या विधानसभा क्षेत्र तक सीमित समर्थकों की बैठक नहीं करेंगे। उनके मुताबिक पूरे मंडल और जनपद में उनके समर्थक हैं। उन्होंने कहा कि सभी को बुलाकर उनकी राय ली जाएगी और इसके बाद ही वह अपने अगले राजनीतिक कदम पर फैसला करेंगे। फिलहाल उनकी फेसबुक पोस्ट और बयानों के बाद यह सवाल बना हुआ है कि समर्थकों की बैठक के बाद धर्मेंद्र कश्यप भाजपा में बने रहते हैं या कोई नया राजनीतिक रास्ता चुनते हैं।