विभाजन विभीषिका दिवस पर कांग्रेस पर बरसे सीएम योगी, बोले- इतिहास से सीखना जरूरी, फिर न बंटे देश

लखनऊ: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1947 के देश विभाजन को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि विभाजन की त्रासदी केवल अतीत की घटना को याद करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इससे देश को भविष्य के लिए सीख लेनी चाहिए। उन्होंने लोगों से आपसी एकता बनाए रखने और दोबारा बंटने की गलती न करने की अपील की।

सीएम योगी ने 1947 के विभाजन को मानव इतिहास के सबसे पीड़ादायक अध्यायों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि उस दौर में बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जन्मभूमि और घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। उनके मुताबिक विभाजन की कीमत आम नागरिकों ने चुकाई और इसके प्रभाव लंबे समय तक महसूस किए जाते रहे हैं।

केवल स्मरण नहीं, इतिहास से सवाल करने का दिन


योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य केवल पुराने घटनाक्रम को याद करना नहीं है। उनके अनुसार, यह अवसर उन परिस्थितियों पर विचार करने का भी है, जिनके कारण देश का विभाजन हुआ।

उन्होंने सवाल उठाया कि विभाजन की स्थिति क्यों बनी, इसके लिए कौन जिम्मेदार था और उस त्रासदी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई। सीएम ने कहा कि इन सवालों पर विचार करना जरूरी है, क्योंकि देश को इतिहास से सबक लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

विभाजन के बाद की चुनौतियों का भी किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन का असर केवल 1947 तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने दावा किया कि भारत को इसके बाद भी अलग-अलग रूपों में इसकी कीमत चुकानी पड़ी। अपने संबोधन में उन्होंने आतंकवाद, नक्सलवाद, माओवाद और उग्रवाद जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया और इन्हें विभाजन के बाद की परिस्थितियों से जोड़कर देखा।

योगी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विभाजन के समय पैदा हुई परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की एकता और अखंडता को लेकर समाज को सतर्क रहना चाहिए।
नागरिकता कानून का उदाहरण देकर कांग्रेस पर हमला

सीएम योगी ने अपने संबोधन में नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा लाए गए इस कानून के विरोध को लेकर उन्हें हैरानी हुई थी।

उन्होंने बताया कि कानून में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के उन लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है, जो वहां से निकलकर भारत में रह रहे हैं और निर्धारित अवधि पूरी कर चुके हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस कानून में किसी की जमीन या संपत्ति लेने का कोई प्रावधान नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद देश के विभिन्न हिस्सों में इसके खिलाफ आंदोलन और विरोध प्रदर्शन हुए। मुख्यमंत्री ने लखनऊ के अलावा कानपुर, मेरठ, संभल, अलीगढ़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर का भी उल्लेख किया।

'आपस में बंटने की गलती नहीं करनी'

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने देशवासियों को अतीत से सीख लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी परिस्थितियों से बचना होगा, जिनसे समाज या देश के भीतर विभाजन की स्थिति पैदा हो।

14 अगस्त को देशभर में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 1947 के विभाजन से प्रभावित लोगों के संघर्ष और साहस को याद किया है। केंद्र सरकार ने 2021 से 14 अगस्त को इस दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की थी, ताकि विभाजन की पीड़ा और उससे जुड़ी परिस्थितियों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके।