लव जिहाद की 'किताब' से मासूमों को गुमराह करता था छांगुर बाबा, ATS के रडार पर 4 और करीबी, कई जिलों तक फैला था नेटवर्क

उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण के सनसनीखेज मामले में जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा (Chhangur Baba Case) की कहानी हर दिन नई परतें खोल रही है। जो लोग अब तक सिर्फ खबरों में पढ़ते थे कि धर्म के नाम पर कैसे मासूमों को बहकाया जाता है, उनके लिए ये मामला एक कड़वी सच्चाई बनकर सामने आया है।

एटीएस की तफ्तीश में जो बातें निकलकर आ रही हैं, वे हैरान करने वाली हैं। बताया जा रहा है कि छांगुर बाबा ने ‘शिजर ए तैयबा’ नाम की एक किताब छपवाकर, उसी को हथियार बनाकर लोगों को लव जिहाद के लिए उकसाया। सोचिए, एक किताब जो समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने का जरिया बन गई।

जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि इस किताब के जरिए न केवल मुस्लिम युवकों को, बल्कि हिंदू युवाओं को भी बरगलाने का प्रयास किया गया। इन युवाओं को यह बताया जाता था कि उनका धर्म उनके खिलाफ है और एक नए रास्ते की ओर ले जाने की कोशिश होती थी। एटीएस को उम्मीद है कि आज की पूछताछ में छांगुर बाबा धर्मांतरण से जुड़े कई और गहरे राज खोलेगा। देर रात उसकी एटीएस टीम के साथ बलरामपुर में मौजूदगी की खबर सामने आई है।

ईडी का शिकंजा भी कसने लगा

छांगुर बाबा के बढ़ते नेटवर्क को देखते हुए ईडी ने भी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। धर्मांतरण के पीछे जो आर्थिक खेल चल रहा था, उसे समझने के लिए ईडी अब उनके करीबियों के बैंक खातों की जांच कर रही है। नवीन रोहरा नाम के शख्स के सात बैंक अकाउंट्स की डिटेल ईडी को मिल चुकी है, जबकि डेढ़ दर्जन और खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।

बलरामपुर सहित आसपास के जिलों में छांगुर और उसके करीबियों के नाम खरीदी गई संपत्तियों का ब्योरा भी उप निबंधक कार्यालयों से मांगा गया है। इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि धर्मांतरण के इस रैकेट के पीछे बड़ा फंडिंग सिस्टम काम कर रहा था।

कई जिलों में फैला है धर्मांतरण का जाल

एटीएस की जांच में यह भी सामने आया है कि छांगुर बाबा अकेला नहीं था, बल्कि उसका नेटवर्क पूर्वांचल के कई जिलों में फैला हुआ था। जमालुद्दीन उर्फ छांगुर के चार करीबी सहयोगी—मोहम्मद सबरोज, रशीद, शहाबुद्दीन (बलरामपुर) और रमजान (गोंडा)—इन गतिविधियों में सक्रिय थे।

इन चारों के खिलाफ पहले ही आजमगढ़ के देवगांव थाने में 25 मई 2023 को केस दर्ज हो चुका है। एफआईआर में कुल 18 नामजद हैं, जिनमें अन्य जिलों के आरोपी भी शामिल हैं—जैसे कि आजमगढ़ निवासी अवधेश सरोज उर्फ वकील, ऊषा देवी, पन्ना लाल गुप्ता, सिकंदर, हसीना, कुंदन बेनवंशी, मऊ निवासी आकाश सरोज, मोहम्मद जावेद, परवेज आलम, इरफान अहमद, साबिर अली, जावेद अहमद और जौनपुर निवासी फैयाज।

यह मामला अब महज कानून का नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति को सुरक्षित रखने की लड़ाई बन चुका है। देखने वाली बात होगी कि एटीएस और ईडी की इस गहन जांच के बाद छांगुर बाबा और उसके पूरे नेटवर्क का सच कब और कैसे सामने आता है।