समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 1.27 करोड़ हिंदू वोट कम होने वाले बयान पर सवाल उठाए हैं। रविवार, 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली में पहुंचे अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूछा कि आखिर यह आंकड़ा मुख्यमंत्री को किसने दिया और इसकी जानकारी का आधार क्या है? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री के मुताबिक बड़ी संख्या में हिंदू मतदाताओं और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के वोट नहीं हैं, तो उन्हें भी रामलीला मैदान आना चाहिए। वोट चोरी और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे पर विपक्ष की इस रैली में अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के बयान को राजनीतिक बहस का विषय बनाया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री खुद एक करोड़ 27 लाख वोट कम होने की बात स्वीकार कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री को उस समय चिंता हुई, जब सत्तारूढ़ दल को एमएलसी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
एमएलसी चुनाव में हार के बाद क्यों आया वोटों का मुद्दा?अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बीजेपी नेता डबल इंजन सरकार की बात करते थे, तब अब सामने आ रहे घटनाक्रम को डबल इंजन, डबल जीरो और एक ही चुनाव में डबल हार के तौर पर देखा जाना चाहिए। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि मतदाताओं की संख्या में कमी का मुद्दा पहले क्यों नहीं उठाया गया? उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को एक करोड़ 27 लाख हिंदू वोट कम होने की बात एमएलसी चुनाव में हार के बाद याद आई। अखिलेश के इस बयान का निशाना मुख्यमंत्री के दावे और उसके पीछे मौजूद आंकड़ों की विश्वसनीयता पर था।
अखिलेश यादव ने पूछा- 1.27 करोड़ वोटों का डेटा किसने दिया?सपा अध्यक्ष ने अपने बयान में आंकड़े के स्रोत को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह सामान्य जानकारी नहीं है, जिसे कोई भी सड़क पर चलते हुए दे सकता है। मुख्यमंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति के पास अगर इतना बड़ा आंकड़ा है, तो यह भी सामने आना चाहिए कि इसे किसने तैयार किया और उन्हें यह जानकारी कहां से मिली। अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस दावे का आधार सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल किया कि इतनी बड़ी संख्या में वोट कम होने की जानकारी उन्हें आखिर कब और कैसे मिली। सपा प्रमुख के मुताबिक, इस मामले में केवल आंकड़ा बताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके स्रोत और तथ्यों को भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के वोट नहीं होने पर भी उठाया सवाल
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के बयान के साथ सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से जुड़ी बात को भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि लाखों लाभार्थियों के वोट नहीं हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि अगर सरकार के दावे के मुताबिक बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची में नहीं हैं, तो इस मुद्दे पर भी आवाज उठाई जानी चाहिए। इसी बात पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री इस तरह की स्थिति बता रहे हैं, तो उन्हें भी दिल्ली के रामलीला मैदान में आना चाहिए। उनका यह बयान विपक्ष की उस मुहिम से जुड़ा था, जिसमें मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार तथा निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा जा रहा है।
INDIA गठबंधन की रैली में वोट चोरी का मुद्दा उठा रहे विपक्षी दलदिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित INDIA गठबंधन की रैली का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची में कथित अनियमितताएं और वोट चोरी के आरोप रहे। विपक्षी दलों ने इस अभियान के तहत निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। रैली से पहले अखिलेश यादव ने इसमें शामिल होने की पुष्टि की थी। अखिलेश यादव ने इसी मंच से उत्तर प्रदेश में 1.27 करोड़ हिंदू वोट कम होने के मुख्यमंत्री के दावे को लेकर सवाल किया। उन्होंने खास तौर पर इस आंकड़े के स्रोत और उसके सामने आने के समय पर आपत्ति जताई। उनके बयान का केंद्रीय सवाल यही रहा कि जब मुख्यमंत्री इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं की संख्या कम होने की बात कह रहे हैं, तो इसके पीछे का आधिकारिक डेटा और उसका आधार भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।