नई दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर 2026 को होने वाली INDIA गठबंधन की विरोध रैली से विपक्षी एकजुटता की तस्वीर पर सवाल उठ रहे हैं। रैली में आम आदमी पार्टी (AAP), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और बीजू जनता दल (BJD) के शामिल नहीं होने की बात सामने आई है। वहीं, तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के रुख को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस रैली का आयोजन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन के दूसरे सहयोगी दल इस कार्यक्रम को चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सरकार तथा निर्वाचन आयोग के खिलाफ साझा विरोध के रूप में पेश कर रहे हैं। हालांकि, कुछ दलों की गैरमौजूदगी और अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों के कारण गठबंधन के भीतर एकजुटता को लेकर चर्चा तेज है।
AAP, DMK, AIMIM और BJD क्यों रहेंगी रैली से दूर?रैली में शामिल नहीं होने वाले दलों में AAP और DMK का INDIA गठबंधन के साथ राजनीतिक रिश्ता पहले से चर्चा में रहा है। दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद AAP और कांग्रेस के बीच दूरी बढ़ी है। दोनों दलों के बीच दिल्ली की राजनीति में सीधा मुकाबला भी रहा है। AAP सांसद संजय सिंह ने पहले गठबंधन की एक अन्य SIR-विरोधी पहल से दूरी पर कहा था कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर सड़क और संसद, दोनों जगह अपना विरोध जारी रखे हुए है। इससे संकेत मिलता है कि SIR के मुद्दे पर विरोध के बावजूद AAP कांग्रेस के नेतृत्व वाले साझा कार्यक्रमों में शामिल होने से परहेज कर रही है।
DMK और कांग्रेस के रिश्तों में भी बदलाव आया है। तमिलनाडु की राजनीति में TVK को कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद DMK ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली पहल से दूरी बनाने का संकेत दिया है। पार्टी ने पहले INDIA गठबंधन की बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया था और कहा था कि वह संसद में CEC के खिलाफ विपक्ष की कार्रवाई का समर्थन कर सकती है, लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व वाले विरोध कार्यक्रमों में शामिल नहीं होगी।
AIMIM और BJD के मामले में भी रैली में शामिल होने को लेकर अलग राजनीतिक स्थिति है। दोनों दल INDIA गठबंधन के नियमित घटक नहीं हैं। इसलिए उनकी गैरमौजूदगी को गठबंधन के भीतर किसी नए टूट के तौर पर देखना सही नहीं होगा। हालांकि, SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उनकी ओर से उठाए गए मुद्दों तथा इस खास रैली में भागीदारी के बीच अंतर को समझना जरूरी है।
TVK को लेकर क्यों बना हुआ है सस्पेंस?
तमिलनाडु की राजनीति में TVK की भूमिका इस घटनाक्रम को और अहम बनाती है। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी राज्य में कांग्रेस के समर्थन से सरकार चला रही है, लेकिन उसने INDIA गठबंधन के इस कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर स्पष्ट रुख नहीं दिखाया है। DMK ने TVK की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उसका आरोप रहा है कि विजय की पार्टी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर स्पष्ट स्थिति नहीं ले रही। DMK ने कांग्रेस से भी पूछा है कि वह TVK के रुख पर जवाब क्यों नहीं मांग रही। दूसरी ओर, कांग्रेस और DMK के बीच पहले रहे राजनीतिक तालमेल में बदलाव के बाद TVK के साथ कांग्रेस की नजदीकी ने तमिलनाडु में नए समीकरण बनाए हैं। हालांकि, TVK के रैली में शामिल न होने की वजह को लेकर किसी आधिकारिक बयान की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि पार्टी ने केंद्र सरकार से टकराव से बचने के लिए ही दूरी बनाई है। फिलहाल उसका रुख स्पष्ट होने का इंतजार है।
रैली में कौन-कौन से विपक्षी नेता हो सकते हैं शामिल?इस कार्यक्रम के लिए कांग्रेस की ओर से पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की भागीदारी की बात कही गई है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से डेरेक ओ'ब्रायन, राष्ट्रीय जनता दल की ओर से तेजस्वी यादव और झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से हेमंत सोरेन का नाम भी शामिल है। समाजवादी पार्टी की ओर से प्रतिनिधियों के शामिल होने की बात कही गई है। आयोजकों ने कार्यक्रम को केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रखा है। छात्र संगठनों, युवा समूहों, नागरिक समाज संगठनों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। विपक्ष की कोशिश है कि SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों को व्यापक जनमुद्दा बनाया जाए।
SIR को लेकर विपक्ष के क्या आरोप हैं?विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से पात्र लोगों के नाम गलत तरीके से हटाए गए। उनका कहना है कि तकनीक के इस्तेमाल और मतदाताओं के सत्यापन की प्रक्रिया में भी खामियां रही हैं। विपक्ष का यह भी आरोप है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर की गई शिकायतों पर निर्वाचन आयोग ने पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। इन्हीं आरोपों के आधार पर विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। गठबंधन के नेताओं ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाने के साथ चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया है। ये विपक्ष के आरोप हैं; इन्हें निर्वाचन आयोग की ओर से प्रमाणित निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
1 नवंबर के मार्च को लेकर पुलिस ने क्या कहा?रैली से पहले राहुल गांधी ने 1 नवंबर को होने वाले 'चलो दिल्ली' मार्च का रूट भी बताया है। उनके मुताबिक, मार्च दोपहर 12 बजे मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से शुरू होकर रामलीला मैदान पहुंचेगा। हालांकि, 31 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि रामलीला मैदान में रैली के लिए अनुमति दी गई है, लेकिन मिंटो रोड से मैदान तक प्रस्तावित मार्च के लिए अलग से अनुमति नहीं मांगी गई है। पुलिस के मुताबिक, संबंधित जिलों को इस मार्च के बारे में आधिकारिक सूचना भी नहीं दी गई थी। दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान में 1 नवंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक रैली आयोजित करने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) दिया है। इसके साथ भीड़ प्रबंधन, CCTV निगरानी, पेयजल, शौचालय और सुरक्षा व्यवस्था जैसी शर्तें रखी गई हैं। आयोजकों को कार्यक्रम शाम 5 बजे तक समाप्त करना होगा। पुलिस ने साफ किया है कि रैली की अनुमति वापस नहीं ली गई है।
BJP ने विपक्ष के आरोपों पर उठाए सवालभारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने SIR को लेकर विपक्ष के आरोपों की आलोचना की है। भाजपा की ओर से इस विरोध कार्यक्रम के समय और राजनीतिक मंशा पर भी सवाल उठाए गए हैं। दूसरी तरफ, निर्वाचन आयोग का रुख है कि उसके फैसले कानूनी आधार पर लिए जाते हैं। ऐसे में 1 नवंबर की रैली में विपक्ष अपने आरोपों और मांगों को किस तरह सामने रखता है, इस पर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा केंद्रित रहेगी।