आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे देश के युवाओं और नई पीढ़ी की महत्वपूर्ण जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों और युवाओं के संघर्ष का परिणाम है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि अब प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक पूरे शिक्षा तंत्र की व्यापक समीक्षा की जाए और आवश्यक सुधारों पर गंभीरता से काम किया जाए।
पेपर लीक रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाने की मांगअखिलेश यादव ने कहा कि हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। ऐसे मामलों पर केवल बयान देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार को ऐसी मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिससे भविष्य में किसी भी परीक्षा की गोपनीयता भंग न हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।
युवाओं की एकजुटता ने सरकार को झुकने पर किया मजबूरसपा सांसद ने कहा कि इंटरनेट, सोशल मीडिया और सड़कों पर लगातार चल रहे युवाओं के आंदोलन ने सरकार पर व्यापक जनदबाव बनाया। उनके अनुसार देशभर के छात्रों और युवाओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद की, जिसके चलते आखिरकार भारतीय जनता पार्टी को झुकना पड़ा। अखिलेश यादव ने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक घटनाक्रम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों में युवाओं के विश्वास और उनकी सामूहिक ताकत का प्रमाण है। उन्होंने इसे नई पीढ़ी की बड़ी जीत बताया।
राजनीतिक दलों को भी लेना चाहिए सबकअखिलेश यादव ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से सभी राजनीतिक दलों को सीख लेने की जरूरत है। उनका कहना था कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीति से ऊपर उठकर काम किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसी परीक्षा प्रणाली विकसित की जाए, जिसमें पेपर लीक जैसी घटनाओं की कोई गुंजाइश न रहे और छात्रों का भरोसा पूरी तरह कायम रहे। इसके साथ ही उन्होंने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और सरकारी भर्तियों को समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से पूरा करने पर भी जोर दिया।
शिक्षा व्यवस्था पर तेज हुई राजनीतिक बहसअखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है। विभिन्न विपक्षी दल इस फैसले को छात्रों के लंबे संघर्ष और जनदबाव का परिणाम बता रहे हैं। वहीं, शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस लगातार तेज होती जा रही है।