उदयपुर में मासूम पर आवारा कुत्तों का जानलेवा हमला, कॉलोनी में दहशत का माहौल, नगर निगम पर लापरवाही का आरोप

लेकसिटी उदयपुर में एक बार फिर आवारा कुत्तों का आतंक सामने आया है। मंगलवार को शहर की खारोल कॉलोनी में एक मासूम बच्चे पर चार से पांच कुत्तों ने अचानक हमला कर दिया। यह पूरी घटना कॉलोनी में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसे देखकर हर कोई स्तब्ध है। इस घटना ने इलाके में दहशत फैला दी है और नगर निगम की लापरवाही को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है।

मासूम पर झुंड में टूट पड़े कुत्ते, CCTV में कैद हुई घटना

मंगलवार को हुई इस दिल दहला देने वाली घटना में मासूम बच्चा अपने घर के बाहर खेल रहा था। तभी कुछ ही दूरी पर घूम रहे आवारा कुत्तों के झुंड ने अचानक उस पर हमला कर दिया। सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि बच्चा कुत्तों से बचने की कोशिश करता रहा, लेकिन वे लगातार उसे काटते रहे। उसकी चीख-पुकार सुनकर लोग घरों से बाहर दौड़े और किसी तरह उसे कुत्तों से छुड़ाया।

गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में भर्ती

घटना के बाद बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजनों ने आनन-फानन में उसे नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां उसे प्राथमिक उपचार देकर छुट्टी दे दी गई। हालांकि, इस हमले ने कॉलोनी के हर परिवार को झकझोर दिया है। लोगों में भय है कि अगला निशाना उनका कोई अपना हो सकता है।
नगर निगम पर लापरवाही के आरोप, बढ़ रहा गुस्सा

स्थानीय निवासी कमल और अन्य लोगों ने बताया कि क्षेत्र में आवारा कुत्तों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई बार नगर निगम और पार्षद को शिकायतें देने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन कुत्तों को पकड़कर इलाके को सुरक्षित नहीं बनाया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

बच्चे की आपबीती और परिजनों की चिंता

घायल बच्चे ने बताया कि जैसे ही वह घर से बाहर निकला, कुत्तों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और उस पर झपट पड़े। वह मदद के लिए चिल्लाता रहा लेकिन बच नहीं सका। परिजनों ने कहा कि वे अपने बच्चों को घर के बाहर भेजने से डरने लगे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन को कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।

स्थानीय लोगों की प्रशासन से अपील


कॉलोनीवासियों ने मांग की है कि क्षेत्र में घूम रहे सभी आवारा कुत्तों को तुरंत पकड़ा जाए और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है कि नगर निगम सख्ती से कार्रवाई करे।

लेकसिटी उदयपुर जैसे पर्यटन स्थल पर इस तरह की घटनाएं न केवल स्थानीय लोगों के लिए खतरे का कारण बनती हैं, बल्कि शहर की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह समय रहते ऐसी घटनाओं को रोके और जनता के जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करे। वरना जनता का आक्रोश किसी भी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।