जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध पंक्ति जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है मौजूदा परिस्थितियों में केंद्र सरकार के रवैये पर पूरी तरह लागू होती है। उन्होंने कहा कि जिस ‘अच्छे दिन’ का वादा देश की जनता से किया गया था, आज उसी का वास्तविक और भयावह चेहरा पूरे देश के सामने है। पुलिस कार्रवाई में घायल होकर अस्पतालों में इलाज करा रहे युवा इस तथाकथित ‘अच्छे दिन’ की सच्चाई को अपनी आंखों से देख रहे हैं।
टीकाराम जूली ने कहा कि इससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि केंद्र सरकार अपने इस रवैये पर किसी तरह का पछतावा तक नहीं जता रही। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को संसद में इस गंभीर विषय पर चर्चा करने का अवसर भी नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना था कि यदि युवाओं पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई और उनके साथ हुए व्यवहार पर संसद में भी चर्चा नहीं होगी, तो आखिर इस महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाया कहां जाएगा।
युवाओं की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा हैनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आज देश का युवा अपने अधिकारों, निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और पारदर्शी परीक्षाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर है। उन्होंने कहा कि इन युवाओं का अपराध केवल इतना है कि वे अपने भविष्य को सुरक्षित देखना चाहते हैं और ईमानदार परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
जूली ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार युवाओं की जायज मांगों को सुनने के बजाय उनके खिलाफ बल प्रयोग का रास्ता अपना रही है। उनके अनुसार, सरकार का अहंकार और संवेदनहीनता इस स्तर तक पहुंच चुकी है कि संवाद स्थापित करने के बजाय प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर कथित रूप से लाठीचार्ज कराया जा रहा है।
राहुल गांधी ने अस्पताल पहुंचकर छात्रों का जाना हालटीकाराम जूली ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी मंगलवार को अस्पताल पहुंचे और पुलिस कार्रवाई में गंभीर रूप से घायल हुए छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने छात्रों का हालचाल जाना और उन्हें भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी इस संघर्ष की घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का यह कदम इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस युवाओं की पीड़ा और उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझती है। दूसरी ओर, उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार सत्ता के अहंकार में इस कदर डूबी हुई है कि उसे युवाओं की तकलीफ और उनकी आवाज सुनाई तक नहीं दे रही।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उठाई मांगनेता प्रतिपक्ष ने केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा कि अब केवल सफाई देने या लीपापोती करने से काम नहीं चलेगा। सरकार को पेपर लीक जैसे मामलों की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए, क्योंकि इन घटनाओं ने देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है और परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा कमजोर किया है।
टीकाराम जूली ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान युवाओं का विश्वास खो चुके हैं। ऐसे में उनके पास पद पर बने रहने का कोई नैतिक आधार नहीं बचा है। उन्होंने मांग की कि शिक्षा मंत्री को बिना किसी देरी के अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए, ताकि युवाओं के बीच सरकार की जवाबदेही का स्पष्ट संदेश जा सके।