जयपुर। राजस्थान में इस साल मानसून की शुरुआत रिकॉर्ड तोड़ रही है। प्रदेशभर में औसत से 135 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर राज्य के जलाशयों पर पड़ा है। बीसलपुर बांध, जो जयपुर सहित टोंक, अजमेर जैसे कई शहरों की पेयजल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है, उसमें बीते 24 घंटों में 85 सेंटीमीटर पानी की आवक दर्ज की गई है।
जयपुर के लिए राहत: 1.80 टीएमसी पानी सिर्फ एक दिन में
विशेष बात यह रही कि त्रिवेणी नदी के तेज बहाव से अकेले 1.80 टीएमसी पानी बांध में आया है, जो कि जयपुर शहर की लगभग एक महीने की पानी की आपूर्ति के बराबर है। इससे बीसलपुर बांध का गेज स्तर बढ़कर 313.49 आरएल मीटर हो गया है। फिलहाल बांध में 693.75 एमसीयूएम पानी उपलब्ध है, जो कुल भराव क्षमता का 63.31% है। तुलना करें तो पिछले साल इसी समय पर ये आंकड़ा केवल 279.60 एमसीयूएम था।
बांध क्षेत्र में भी बारिश, त्रिवेणी का जलस्तर 3.90 मीटरबांध क्षेत्र में खुद 7 मिमी बारिश दर्ज की गई है, और जल प्रवाह का मुख्य स्रोत मानी जाने वाली त्रिवेणी नदी 3.90 मीटर पर बह रही है। लगातार बारिश और नदी में बहाव के चलते विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रफ्तार बनी रही तो इस साल जुलाई में ही बीसलपुर बांध के गेट खोलने की नौबत आ सकती है।
बीसलपुर बांध में रिकॉर्ड जल भराव, जल्द खुल सकते हैं गेटबीसलपुर बांध के गेट आमतौर पर अगस्त के मध्य या अंत में खोले जाते हैं, लेकिन इस साल मौसम की तीव्रता को देखते हुए संभावना है कि पहली बार जुलाई में ही गेट खोलने की आवश्यकता पड़ सकती है।
राज्य के सबसे महत्वपूर्ण जलस्रोतों में शुमार बीसलपुर बांध में मात्र 24 घंटे में 85 सेमी पानी की आवक दर्ज की गई। अभी बांध का जलस्तर 313.49 आरएल मीटर पहुंच चुका है, और 63.31% भराव क्षमता के साथ इसमें 693.75 एमसीयूएम पानी मौजूद है। अकेले त्रिवेणी नदी से एक दिन में 1.80 टीएमसी पानी आया, जो जयपुर शहर की एक महीने की जल आपूर्ति के बराबर है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बारिश का यही क्रम बना रहा तो इस बार जुलाई में ही बीसलपुर के गेट खोले जा सकते हैं, जो अब तक सितंबर में खोले जाते रहे हैं। इससे पहले 2024 में 6 सितंबर, जबकि 2019 में 19 अगस्त को गेट खोले गए थे।
अगर इस बार जुलाई में गेट खोले जाते हैं, तो यह बीसलपुर के इतिहास में सबसे जल्दी गेट खोलने का रिकॉर्ड होगा।
क्यों खास है बीसलपुर बांध?बीसलपुर बांध राजस्थान के प्रमुख बहुद्देश्यीय जल परियोजनाओं में से एक है। यह जयपुर, अजमेर और टोंक जैसे बड़े शहरों के लिए पेयजल का मुख्य स्रोत है। इसलिए इसमें जलस्तर की स्थिति सीधे लाखों लोगों के जीवन से जुड़ी हुई है। इस साल मानसून की जोरदार दस्तक ने जहां गर्मी से राहत दी है, वहीं जलाशयों की भराव स्थिति ने प्रशासन को भी राहत की सांस दी है।
बीसलपुर के लिए संजीवनी साबित हो रहा मानसूनराजस्थान में मानसून का यह उग्र रूप, जहां एक तरफ कुछ जिलों में बाढ़ जैसी स्थितियां पैदा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बीसलपुर जैसे अहम जलाशयों के लिए संजीवनी साबित हो रहा है। अगर यही क्रम बना रहा तो जल्द ही जल संकट वाले क्षेत्रों में जल आपूर्ति की स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। वहीं बांध के गेट जल्द खोलने की तैयारियों ने भी जल प्रबंधन और संभावित बाढ़ नियंत्रण के प्रति प्रशासन की जिम्मेदारी को और बढ़ा दिया है।