राजस्थान में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग ने एक अहम पहल करते हुए नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं। इन निर्देशों के तहत प्रदेश के सभी बालिका विद्यालयों और छात्रावासों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर सख्त नियंत्रण लगाया गया है। अब किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को परिसर में आने की अनुमति नहीं होगी, जिससे छात्राओं की सुरक्षा को और मजबूत बनाया जा सके।
नए नियमों के अनुसार, केवल वही लोग स्कूल या हॉस्टल परिसर में प्रवेश कर सकेंगे जिनका नाम पहले से छात्रा के अभिभावक या अधिकृत संरक्षक के रूप में दर्ज है। इसके अलावा, किसी भी बाहरी व्यक्ति को बिना अभिभावकों की जानकारी और अनुमति के छात्राओं से मिलने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्राओं के संपर्क में आने वाला हर व्यक्ति सत्यापित और विश्वसनीय हो।
दरअसल, यह कदम महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट के 9,537 मामले दर्ज किए गए। वहीं, अपहरण के 7,663, दुष्कर्म के 5,194 और दुष्कर्म के प्रयास के 846 मामलों ने चिंता बढ़ाई है। ऐसे आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि सुरक्षा उपायों को और सख्त करने की आवश्यकता है।
शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सभी स्कूलों के प्रिंसिपल और छात्रावासों के वार्डन को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि नए नियमों का सख्ती से पालन हो और किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए। इस पहल पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने भी प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि इसी तरह की व्यवस्था पहले सामाजिक न्याय विभाग के छात्रावासों में लागू की जा चुकी है, जहां इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले थे।
नए प्रावधान के तहत, यदि कोई व्यक्ति छात्रा से मिलने आता है तो उसकी पहचान अनिवार्य रूप से दर्ज की जाएगी। प्रवेश के समय आगंतुक का नाम और फोटो रिकॉर्ड किया जाएगा, ताकि हर व्यक्ति की एंट्री का स्पष्ट रिकॉर्ड मौजूद रहे। यह व्यवस्था न केवल निगरानी को मजबूत बनाएगी, बल्कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पहचानने में भी मदद करेगी।
इस निर्णय के बाद अब प्रदेश के सभी बालिका विद्यालयों और छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सख्त हो जाएगी। शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि इस कदम से छात्राओं के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल तैयार होगा, जिससे वे बिना किसी डर के अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें।