राजस्थान में बिजली पर बड़ी घोषणा, निजीकरण की अटकलों पर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने लगाया विराम

राजस्थान में बिजली व्यवस्था और ऊर्जा नीतियों को लेकर उठ रही अटकलों के बीच ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने झुंझुनूं से एक बड़ा संदेश दिया है। मंगलवार शाम अजमेर विद्युत वितरण निगम (AVVNL) के कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राज्य सरकार बिजली विभाग के निजीकरण की दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही है। इस बयान के साथ ही उन्होंने कर्मचारियों और किसानों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की।

बैठक के दौरान मंत्री ने विभाग में चल रही निजीकरण की चर्चाओं को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक ढांचे को मजबूत करना है, न कि उसे निजी हाथों में सौंपना। उन्होंने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि उनके हित सुरक्षित हैं और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है।

किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए मंत्री नागर ने एक महत्वपूर्ण लक्ष्य भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार वर्ष 2027 तक हर किसान को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। इससे किसानों को रात में खेतों में सिंचाई करने की मजबूरी से राहत मिलेगी और उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ेगी।

झुंझुनूं जिले के सौर ऊर्जा मॉडल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह जिला प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मिसाल बन चुका है। कुसुम ‘A’ और ‘C’ योजना के तहत यहां 45 सोलर प्लांट स्थापित किए गए हैं, जिनसे लगभग 68 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। मंत्री ने कहा कि इस मॉडल को अन्य जिलों में भी लागू करने की योजना है, ताकि सौर ऊर्जा का दायरा और बढ़ाया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के तहत रूफटॉप सोलर अपनाने वाले उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित भी किया गया। इस मौके पर लाभार्थियों को इंडक्शन चूल्हे वितरित किए गए। मंत्री ने कहा कि स्वच्छ और हरित ऊर्जा को अपनाने से जहां बिजली खर्च में कमी आएगी, वहीं पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में सोलर प्लांट स्थापित हैं, वहां बैटरी स्टोरेज सिस्टम विकसित करने की संभावनाओं पर गंभीरता से काम किया जाए। इससे बिजली की मांग बढ़ने के समय भी आपूर्ति को संतुलित रखा जा सकेगा और कटौती की समस्या कम होगी।

बैठक में विभागीय कार्यों की धीमी प्रगति पर मंत्री ने नाराजगी भी जताई। उन्होंने आरडीएसएस परियोजना के तहत चल रहे फीडर सेग्रीगेशन और अन्य निर्माण कार्यों को मानसून से पहले पूरा करने का स्पष्ट निर्देश दिया। साथ ही 33 केवी जीएसएस और ट्रांसमिशन सिस्टम की निगरानी बढ़ाने को कहा, ताकि उपभोक्ताओं को बिना रुकावट बिजली मिल सके।

इस समीक्षा बैठक में पूर्व सांसद संतोष अहलावत, वरिष्ठ अधिकारी महेश टीबड़ा सहित कई जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। कुल मिलाकर, झुंझुनूं में हुई इस बैठक के जरिए सरकार ने साफ कर दिया है कि वह एक ओर जहां ऊर्जा क्षेत्र में सुधार और विस्तार पर ध्यान दे रही है, वहीं दूसरी ओर किसानों और उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए ठोस कदम उठा रही है।