राजस्थान कांग्रेस में सियासी तापमान फिर चढ़ा, पायलट के पोस्टर से गहलोत की तस्वीर गायब होने पर नई बहस शुरू

राजस्थान कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है, जहां सचिन पायलट के एक कार्यक्रम से जुड़ा पोस्टर राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। करौली जिले में आयोजित किसान सम्मेलन के मौके पर सचिन पायलट अपने दिवंगत पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट की प्रतिमा का अनावरण करने वाले हैं। इस कार्यक्रम को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं, लेकिन इसी बीच सोशल मीडिया पर एक पोस्टर वायरल होने के बाद सियासी माहौल गर्मा गया है।

वायरल पोस्टर में कांग्रेस के कई राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं की तस्वीरें शामिल हैं, लेकिन इसमें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अनुपस्थिति ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि यह पोस्टर स्वयं सचिन पायलट ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया है, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में इस पर अलग-अलग तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

स्टेज बैनर में गहलोत शामिल, लेकिन पायलट के पोस्टर से दूरी बनी चर्चा का विषय

कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए आधिकारिक मंचीय बैनर में स्थिति थोड़ी अलग नजर आती है, जहां कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ अशोक गहलोत की तस्वीर भी मौजूद है। इससे यह संकेत मिलता है कि औपचारिक आयोजन में उन्हें शामिल किया गया है, लेकिन पायलट द्वारा साझा किए गए एक अलग पोस्टर में उनका नाम और चेहरा नदारद है। यही अंतर अब राजनीतिक विश्लेषकों और कार्यकर्ताओं के बीच बहस का कारण बन गया है।

पोस्टर में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की तस्वीरें शामिल हैं। इसके अलावा संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की तस्वीरें भी दिखाई गई हैं। हालांकि इन प्रमुख चेहरों के बीच अशोक गहलोत की गैरमौजूदगी ने अटकलों को और तेज कर दिया है कि क्या यह सिर्फ संयोग है या फिर इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश छिपा है।
पिछले मेल-मिलाप की यादें भी फिर चर्चा में

राजनीतिक खींचतान के बीच यह भी याद दिलाया जा रहा है कि पिछले वर्ष राजेश पायलट की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अशोक गहलोत को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। उस समय सचिन पायलट स्वयं गहलोत को निमंत्रण देने उनके आवास तक पहुंचे थे, जिसकी तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किए गए थे।

उस आयोजन में गहलोत की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली थी और मंच पर दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी भी नजर आई थी। पायलट ने सार्वजनिक रूप से गहलोत का स्वागत किया था और उनके शामिल होने पर आभार भी जताया था। ऐसे में मौजूदा घटनाक्रम को लेकर पुराने रिश्तों और हालिया तनाव के बीच तुलना शुरू हो गई है।

गहलोत के बयान और पायलट की रणनीति पर नई बहस

विवाद की पृष्ठभूमि में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा हाल ही में दिए गए बयान भी अहम माने जा रहे हैं। जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने सचिन पायलट पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिशें हुई थीं और कांग्रेस अध्यक्ष पद की उनकी संभावनाओं को प्रभावित किया गया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि यदि सरकार के दौरान किसी से गलती हुई हो तो उसे स्वीकार कर मामला समाप्त किया जाना चाहिए।

इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा और तेज हो गई कि क्या सचिन पायलट ने अपने नए पोस्टर के जरिए किसी तरह का अप्रत्यक्ष जवाब दिया है। हालांकि पायलट की ओर से इस पर कोई सीधा बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पोस्टर को लेकर उठे सवालों ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को फिर से चर्चा में ला दिया है।

विवाद के बीच बीजेपी को मिला हमला करने का मौका

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजस्थान की सियासत में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी को भी कांग्रेस पर निशाना साधने का अवसर मिल गया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद अब सार्वजनिक रूप से सामने आ रहे हैं, जिससे पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल यह मामला केवल एक पोस्टर से शुरू हुई चर्चा से आगे बढ़कर बड़े राजनीतिक संकेतों की ओर इशारा करता नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच यह सियासी दूरी और बढ़ती है या फिर पार्टी नेतृत्व किसी तरह से इस तनाव को कम करने में सफल होता है।