भाजपा में अंदरूनी कलह तेज, दिल्ली के दबाव में वसुंधरा पर बयान दे रहे राठौड़: गहलोत

जयपुर: भाजपा के भीतर जारी बयानबाजी अब सियासी विवाद का रूप ले चुकी है। प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर की गई टिप्पणी को लेकर पार्टी के अंदर हलचल तेज हो गई है। इस बीच अशोक गहलोत ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए राठौड़ पर निशाना साधा है। गहलोत का कहना है कि राठौड़ व्यक्तिगत रूप से अच्छे व्यक्ति हैं, लेकिन वे दिल्ली के दबाव में इस तरह के बयान दे रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि भले ही यह भाजपा का आंतरिक मामला है, लेकिन वसुंधरा राजे को इस मुद्दे पर सफाई देने की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने मदन राठौड़ को एक सरल और व्यवहारिक नेता बताते हुए कहा कि पार्टी दबाव के चलते कई बार नेता ऐसे बयान दे देते हैं, जो विवाद का कारण बन जाते हैं। गहलोत ने यह भी कहा कि यदि प्रदेशाध्यक्ष यह कहते हैं कि “क्या वसुंधरा राजे बार-बार मुख्यमंत्री बनेंगी”, तो इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, ऐसे विषयों पर फैसला शीर्ष नेतृत्व यानी प्रधानमंत्री या पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर छोड़ देना चाहिए था।
गहलोत ने भाजपा में बढ़ती गुटबाजी को भी उजागर करते हुए कहा कि पार्टी के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आ रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक ओर वसुंधरा राजे कुछ कह रही हैं, तो दूसरी ओर मदन राठौड़ अलग बयान दे रहे हैं, जो पार्टी की स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा अक्सर कांग्रेस में अंतर्कलह का आरोप लगाती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि उनके अपने घर में ही विवाद बढ़ते जा रहे हैं। गहलोत के मुताबिक, भाजपा के अंदरूनी मतभेद अब सार्वजनिक हो चुके हैं, जबकि कांग्रेस एकजुट होकर आगे बढ़ रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य में हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन की परंपरा जारी रहेगी और 2027 में कांग्रेस की सरकार बनेगी।

अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी गहलोत ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक गतिविधियों का जिक्र करते हुए कहा कि कई देशों को उम्मीद थी कि भारत इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा। लेकिन स्थिति यह बनी कि भारत की जगह पाकिस्तान को इस भूमिका में देखा जा रहा है, जिसकी छवि आतंकवाद से जुड़ी रही है। गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा इस अवसर का लाभ उठाने में चूक गए, जो देश के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मौका हो सकता था।