राजस्थान में भ्रष्टाचार पर सख्त रुख अपनाते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की स्पेशल यूनिट कोटा ने बूंदी जिले में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मंगलवार को केशोरायपाटन पंचायत समिति की सखावदा ग्राम पंचायत में तैनात ग्राम विकास अधिकारी (VDO) सतवीर सिंह कुमावत को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। इस कार्रवाई के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है और पंचायत स्तर पर फैले भ्रष्टाचार को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं।
विकास कार्यों की फाइल के बदले मांगी थी रिश्वतमामला स्वच्छ भारत मिशन के तहत कराए गए विकास कार्यों के भुगतान से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता ने गांव सखावदा में सफाई व्यवस्था सुधारने और नालियों के निर्माण जैसे काम करवाए थे, जिनके एवज में लगभग 1.5 लाख रुपये की राशि लंबित थी। सभी कार्य पूरे होने और बिल पास होने के बावजूद भुगतान जारी करने में देरी की जा रही थी। आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी सतवीर सिंह कुमावत ने भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत की मांग की थी।
ACB ने जाल बिछाकर पकड़ा आरोपीपीड़ित ने 5 मई 2026 को कोटा स्थित एसीबी कार्यालय में इसकी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में यह भी बताया गया कि अधिकारी केवल पुराने बकाया बिलों के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य में आने वाली विकास योजनाओं में बिना बाधा काम कराने के नाम पर भी अतिरिक्त राशि की मांग कर रहा था।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए ACB ने गोपनीय सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकुल शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई और योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप लगाया गया।
जैसे ही शिकायतकर्ता ने तय योजना के अनुसार 25 हजार रुपये की राशि आरोपी अधिकारी को सौंपी, टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही पकड़ लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से पंचायत समिति परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारी सकते में आ गए।
आगे की जांच तेज, कई ठिकानों पर छापेमारीइस पूरे मामले में ACB की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव के निर्देशन में आगे की जांच जारी है। आरोपी के विभिन्न ठिकानों पर तलाशी अभियान भी चलाया जा रहा है ताकि संभावित लेन-देन और अन्य मामलों की जानकारी जुटाई जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, सतवीर सिंह कुमावत के कामकाज को लेकर पहले भी क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं सामने आती रही थीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई थी। इस बार शिकायतकर्ता की सतर्कता और ACB की त्वरित कार्रवाई के चलते आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया गया।
फिलहाल आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई के बाद पंचायत स्तर पर फैले भ्रष्टाचार के नेटवर्क को लेकर भी जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं।