हाईवे पर सांड से टकराई हार्ले डेविडसन, पीडब्ल्यूडी के अविनाश शर्मा की मौत, अगली पोस्टिंग से पहले थम गई ज़िंदगी

राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक दर्दनाक और स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है। प्रदेश के वरिष्ठ पीडब्ल्यूडी अधिकारी अविनाश शर्मा की रविवार को एक भीषण सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। यह हादसा तब हुआ जब वे अपनी हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिल से दौलतपुरा फ्लाईओवर के पास जा रहे थे और अचानक एक आवारा सांड सामने आ गया। टक्कर इतनी जबर्दस्त थी कि अस्पताल पहुंचाने से पहले ही उनकी मौत हो गई।

45 वर्षीय अविनाश शर्मा, जो राजस्थान लोक निर्माण विभाग में अधीक्षण अभियंता के पद पर कार्यरत थे, रविवार सुबह करीब 11 बजे जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर बाइक से लौट रहे थे। वे जयपुर में तैनात थे और अगले महीने उन्हें अतिरिक्त मुख्य अभियंता (एडिशनल चीफ़ इंजीनियर) के पद पर पदोन्नत किया जाना था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

दौलतपुरा फ्लाईओवर के समीप अचानक एक आवारा सांड सड़क पर आ गया और उनकी हार्ले डेविडसन उससे सीधी टकरा गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक उछलकर दूर जा गिरी और अविनाश शर्मा दूर फेंके गए। वे हेलमेट पहने हुए थे, लेकिन सिर पर गंभीर चोटें आईं।
SMS अस्पताल में नहीं बचाया जा सका जीवन

हादसे के बाद उन्हें गंभीर अवस्था में एसएमएस अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम के बाद उनका शव परिजनों को सौंपा गया। इस हृदयविदारक खबर से विभागीय महकमे में शोक की लहर दौड़ गई है।

अविनाश शर्मा राज्य प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी अजीताभ शर्मा के छोटे भाई थे। दोनों भाइयों ने मिलकर शिक्षा और प्रशासन के क्षेत्र में अहम योगदान दिया था। अविनाश के करीबी सहयोगियों ने बताया कि वे बेहद मेहनती और समर्पित अधिकारी थे। पीडब्ल्यूडी में उनका कार्यकाल बेहद प्रभावशाली रहा।

सवालों के घेरे में सड़क सुरक्षा


इस घटना ने एक बार फिर से राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की मौजूदगी और ट्रैफिक व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है। राज्य भर में ऐसे कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रभावी समाधान अब तक नहीं निकला है। एक अधिकारी की सड़क पर इस तरह से मौत होना, व्यवस्थागत विफलता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

एक अधूरी पदोन्नति की कहानी

बताया जा रहा है कि अविनाश शर्मा का प्रमोशन ऑर्डर अगले ही सप्ताह जारी होने वाला था। एडिशनल चीफ़ इंजीनियर के रूप में उन्हें नई जिम्मेदारी मिलने वाली थी। लेकिन उससे पहले ही उनकी ज़िंदगी का ये सफ़र खत्म हो गया। परिवार, विभाग और मित्र मंडली के लिए यह व्यक्तिगत क्षति ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील अधिकारी की असमय विदाई भी है।