जयपुर में हुए एक अनोखे लेकिन विवादित फोटोशूट ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। गुलाबी रंग में रंगे हाथी के साथ शूट की गई तस्वीरों के बाद अब फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा ने एक नया वीडियो साझा किया है, जिसने इस विवाद को और हवा दे दी है। इस वीडियो में जूलिया खुद भी गुलाबी रंग से सजी नजर आती हैं और मशहूर हवा महल के सामने पोज देती दिखाई देती हैं। पहली नजर में यह वीडियो किसी एआई क्रिएशन जैसा लगता है, लेकिन जूलिया का कहना है कि इसमें किसी भी तरह की आर्टिफिशियल तकनीक का इस्तेमाल नहीं हुआ।
“AI नहीं, सब कुछ असली है”जूलिया बुरुलेवा ने साफ तौर पर दावा किया है कि उनका पूरा प्रोजेक्ट रियल लोकेशंस पर शूट किया गया है। उनके अनुसार, यह कोई डिजिटल आर्ट या एआई जनरेटेड कंटेंट नहीं, बल्कि वास्तविक शूटिंग का नतीजा है। उन्होंने बताया कि यह सीरीज “पिंक सिटी” थीम पर आधारित है, जिसे उन्होंने भारत में अपने आर्ट एक्सपेडिशन के दौरान तैयार किया।
छह हफ्तों की मेहनत से तैयार हुआ प्रोजेक्टफोटोग्राफर ने बताया कि जयपुर में बिताए गए छह हफ्तों के दौरान उन्होंने इस पूरी सीरीज को शूट किया। इस दौरान उन्होंने शहर के अलग-अलग हिस्सों में लोकेशन तलाशीं, रोशनी और एंगल्स के साथ प्रयोग किया और हर फ्रेम को बारीकी से तैयार किया। उनके मुताबिक, यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक फोटोशूट नहीं, बल्कि एक लंबी क्रिएटिव यात्रा का परिणाम है।
जयपुर का अनुभव बताया खासजूलिया ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि जयपुर में काम करना उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण और रोमांचक रहा। लगातार नई जगहों की खोज, शूट की प्लानिंग, सही लाइट का इंतजार और हर छोटे-छोटे डिटेल पर ध्यान देना—इन सबने इस आर्टवर्क को खास बनाया। उन्होंने इसे अपने करियर के यादगार अनुभवों में से एक बताया।
विवाद की जड़ क्या है?पूरा विवाद उस फोटोशूट से शुरू हुआ, जिसमें एक हाथी को चमकीले गुलाबी रंग से रंगा गया था और उसके साथ मॉडल के साथ तस्वीरें ली गई थीं। जैसे ही ये तस्वीरें वायरल हुईं, सोशल मीडिया पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने इसे पशुओं के साथ क्रूरता और शोषण का उदाहरण बताया।
वन विभाग ने लिया संज्ञानमामले ने तूल पकड़ने के बाद राजस्थान वन विभाग ने भी इस पर ध्यान दिया है। विभाग ने जांच शुरू कर दी है कि इस फोटोशूट के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं और क्या जानवर की सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का पालन किया गया था।
फिलहाल यह मामला कला और नैतिकता के बीच बहस का विषय बन गया है, जहां एक ओर इसे क्रिएटिव एक्सप्रेशन बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पशु अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।