20 वर्षों से बंद पड़ा पांचना बांध का गेट आखिर खुला, तकनीकी बाधा दूर होने के बाद शुरू हुई जलापूर्ति

जयपुर। करौली और सवाई माधोपुर के किसानों के बीच सिंचाई के पानी के बंटवारे को लेकर करीब दो दशक से चला आ रहा पांचना बांध विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों और प्रशासन की सक्रिय पहल के बाद सहमति के आधार पर बांध से पानी छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। हालांकि इस दौरान एक महत्वपूर्ण गेट में आई तकनीकी खराबी ने स्थिति को जटिल बना दिया, लेकिन पूरी रात चले विशेष अभियान के बाद मंगलवार तड़के करीब 4:50 बजे गेट को सफलतापूर्वक खोल दिया गया। इसके साथ ही लगभग 20 वर्षों से बंद पड़ा गेट भी फिर से संचालित हो गया और जलापूर्ति सामान्य हो गई।

तकनीकी बाधा बनी चुनौती, विशेषज्ञों ने रातभर संभाला मोर्चा

बांध से पानी छोड़ने की प्रक्रिया शुरू होते ही एक अहम गेट में तकनीकी समस्या सामने आ गई, जिससे जल प्रवाह प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने बिना समय गंवाए जल संसाधन विभाग और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को मौके पर तैनात कर दिया।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के साथ-साथ भरतपुर, बीसलपुर और उत्तर प्रदेश के मथुरा से भी विशेषज्ञ तकनीकी टीमों को तत्काल बुलाया गया। संयुक्त टीमों ने पूरी रात लगातार अभियान चलाकर गेट की खराबी को दूर करने का प्रयास किया।

20 वर्षों से जाम पड़ा गेट भी हुआ चालू


मरम्मत अभियान के दौरान इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों ने न केवल मौजूदा खराबी को ठीक किया, बल्कि वह गेट भी खोलने में सफलता हासिल की, जो करीब 20 वर्षों से जाम पड़ा हुआ था। गेट खुलने के बाद लिफ्ट सिस्टम, नहरों और नदी की ओर जाने वाले सभी जलमार्गों से पानी का प्रवाह सुचारु रूप से शुरू हो गया।

इसके बाद कमांड क्षेत्र के विभिन्न इलाकों तक सिंचाई का पानी पहुंचना शुरू हो गया, जिससे लंबे समय से इंतजार कर रहे किसानों को बड़ी राहत मिली।
दिल्ली दौरे के बावजूद सीएम भजनलाल रखते रहे हर पल की जानकारी

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दिल्ली दौरे पर थे, लेकिन उन्होंने दूर रहते हुए भी ऑपरेशन की लगातार निगरानी की। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, वे पूरी रात जयपुर, करौली और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार फोन पर संपर्क में रहे और समय-समय पर प्रगति की जानकारी लेते रहे।

मुख्यमंत्री की सीधी मॉनिटरिंग के चलते प्रशासनिक मशीनरी पूरी रात सक्रिय रही। अधिकारियों और तकनीकी टीमों ने बिना रुके अभियान जारी रखा, जिसका परिणाम यह रहा कि सूर्योदय से पहले ही तकनीकी समस्या का समाधान कर लिया गया और पानी की आपूर्ति बहाल हो गई।

किसानों को मिली राहत, अब समझौते के अनुसार होगा जल वितरण

पिछले कई दिनों से करौली और सवाई माधोपुर के किसान पानी में हिस्सेदारी को लेकर धरना-प्रदर्शन और महापड़ाव कर रहे थे। सिंचाई के अधिकार को लेकर दोनों जिलों के किसानों के बीच लगातार तनाव बना हुआ था, जिससे सरकार पर भी समाधान निकालने का दबाव बढ़ रहा था।

अब बांध से पानी छोड़े जाने के बाद कमांड एरिया के किसानों को सिंचाई के लिए आवश्यक पानी मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में जल वितरण को लेकर दोबारा किसी प्रकार का विवाद न हो, इसके लिए तय समझौते के अनुसार सभी क्षेत्रों तक उनके हिस्से का पानी पारदर्शी तरीके से पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही जल प्रबंधन प्रणाली की नियमित निगरानी भी की जाएगी, ताकि किसानों को समय पर सिंचाई का लाभ मिलता रहे।