देशभर में मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक NEET UG का आयोजन कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच किया जा रहा है। विभिन्न राज्यों में परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की गहन जांच के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। इसी बीच राजस्थान के अजमेर से एक ऐसा मामला सामने आया जिसने परीक्षा केंद्र पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी। बुर्का पहनकर परीक्षा देने पहुंची एक छात्रा को शुरुआती तौर पर केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया, जिसके बाद छात्रा और उसके परिजनों ने नाराजगी जाहिर की।
कुलसुम बानो नाम की छात्रा का आरोप है कि उसे केवल इसलिए रोका गया क्योंकि उसने बुर्का पहन रखा था। इस घटना के बाद परीक्षा केंद्र के बाहर बहस और हंगामे जैसी स्थिति बन गई। हालांकि बाद में अधिकारियों की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद छात्रा को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दे दिया गया। लेकिन प्रवेश मिलने से पहले छात्रा ने साफ शब्दों में कहा कि उसके लिए उसकी धार्मिक पहचान और बुर्का अधिक महत्वपूर्ण हैं, परीक्षा नहीं।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान कुलसुम बानो ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वह ब्यावर से परीक्षा देने के लिए अजमेर पहुंची थी। उसके अनुसार, सबसे पहले उसे दुपट्टा हटाने के लिए कहा गया। जब उसने इस पर सवाल उठाया तो बाद में उसे बुर्का उतारने की बात भी कही गई। छात्रा ने कहा कि उसने 3 मई को आयोजित परीक्षा में भी यही परिधान पहना था और उस समय किसी प्रकार की आपत्ति नहीं जताई गई थी।
कुलसुम ने कहा, “मैं आज भी वही कपड़े पहनकर आई हूं जो पहले परीक्षा के दौरान पहने थे। पहले कहा गया कि दुपट्टा हटाना होगा, फिर बुर्का हटाने की बात कही गई। अगर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने धार्मिक परिधान पहनने की अनुमति दी है, तो किसी को भी हमें रोकने का अधिकार नहीं है।” उसने आगे कहा कि यदि उसे अपने पारंपरिक कपड़ों में परीक्षा केंद्र के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी जाती, तो वह परीक्षा देना ही पसंद नहीं करेगी।
छात्रा ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि उसके लिए उसकी पहचान और धार्मिक आस्था से जुड़ा परिधान बेहद अहम है। उसने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि उसे अपनी परीक्षा और अपनी पहचान में से किसी एक को चुनने जैसी परिस्थिति का सामना करना पड़ा। कुलसुम ने दो टूक कहा कि उसके लिए उसका बुर्का और उसकी पहचान सबसे अधिक मायने रखते हैं।
पिता ने भी जताई आपत्ति, नियमों का किया हवालाइस पूरे विवाद पर छात्रा के पिता मोहम्मद आलिम ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एनटीए के दिशा-निर्देशों के अनुसार अभ्यर्थियों को धार्मिक परिधान पहनकर परीक्षा में शामिल होने की अनुमति है, इसलिए उनकी बेटी को भी प्रवेश मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बुर्का हटाने की शर्त रखी जाती, तो उनकी बेटी परीक्षा नहीं देती।
मोहम्मद आलिम ने बताया कि उनकी बेटी पिछले तीन वर्षों से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही है और इस परीक्षा के लिए उसने काफी मेहनत की है। उन्होंने यह भी कहा कि 3 मई को आयोजित परीक्षा के दौरान भी उनकी बेटी ने बुर्का पहन रखा था और तब किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई थी। पिता के अनुसार, उन्होंने केंद्र प्रशासन से अनुरोध किया था कि यदि जांच आवश्यक है तो किसी महिला कर्मचारी के माध्यम से अलग स्थान या पर्दे के पीछे जांच कर ली जाए, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई।
पुलिस ने बताया— गलतफहमी दूर होने के बाद मामला शांतमामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सीओ नॉर्थ शिवम जोशी ने कहा कि परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों को निर्धारित समय के अनुसार ही प्रवेश दिया गया था और समय सीमा समाप्त होने के बाद गेट बंद कर दिए गए थे। उन्होंने बताया कि बुर्के को लेकर जो विवाद सामने आया था, वह बाद में सुलझा लिया गया।
शिवम जोशी के मुताबिक कुछ नियमों की व्याख्या को लेकर शुरुआती स्तर पर भ्रम की स्थिति बनी थी। बाद में वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट की, जिसके बाद सभी पक्षों के बीच सहमति बन गई और विवाद समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्र पर अब किसी तरह की अव्यवस्था या तनाव नहीं है तथा सभी अभ्यर्थी शांतिपूर्वक परीक्षा प्रक्रिया में शामिल हो चुके हैं।