राजस्थान के नीमराना (कोटपूतली-बहरोड़) इलाके में एक अवैध कबाड़ गोदाम में लगी भीषण आग ने दिल दहला देने वाला मंजर पैदा कर दिया। इस दर्दनाक हादसे में चार लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जिनमें दो मासूम बच्चे भी शामिल हैं। वहीं, एक महिला गंभीर रूप से झुलस गई है और उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
इस भयावह घटना के बाद दो अन्य लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि वे भी हादसे की चपेट में आ सकते हैं। मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है, क्योंकि शव बुरी तरह झुलस चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि डीएनए जांच के माध्यम से उनकी पहचान सुनिश्चित की जाएगी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सभी पीड़ित झारखंड के रहने वाले थे।
घटना शुक्रवार शाम करीब 5 बजे की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी भयानक थी कि उसकी लपटें करीब एक किलोमीटर दूर तक दिखाई दे रही थीं। आसपास के लोगों ने बताया कि लंबे समय तक पूरे इलाके में काले धुएं का गुबार छाया रहा, जिससे सांस लेना भी मुश्किल हो गया था।
स्थानीय सूत्रों और शुरुआती जांच के मुताबिक, हादसे की वजह परफ्यूम की बोतलों से निकले ज्वलनशील केमिकल को माना जा रहा है। बताया गया है कि कबाड़ में मिली परफ्यूम की बोतलों को तोड़ते समय उनसे निकला स्पिरिट जैसा पदार्थ जमीन पर फैल गया। इसी दौरान वहां मौजूद केमिकल से भरे ड्रमों में भी तेज धमाके होने लगे, जिससे आग और भड़क गई।
पुलिस के अनुसार यह गोदाम कृषि भूमि पर अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था, जिसे करण सिंह पुत्र मामन सिंह कोलीला ने किराये पर लिया हुआ था। हादसे के वक्त कुछ मजदूर कबाड़ छांटने का काम कर रहे थे। इसी दौरान कबाड़ लेकर पहुंचे एक पिकअप चालक ने बीड़ी पी और उसकी जलती तीली फेंक दी, जिससे जमीन पर फैले ज्वलनशील पदार्थ ने तुरंत आग पकड़ ली और देखते ही देखते पूरा गोदाम आग की चपेट में आ गया।
आग पर काबू पाने के बाद देर रात तक राहत और बचाव कार्य जारी रहा। गोदाम में काम करने वाले अन्य मजदूरों ने बताया कि उनके दो साथी अब भी लापता हैं। प्रशासन और दमकल विभाग की टीमों को आग बुझाने में करीब चार घंटे का समय लगा। फिलहाल गोदाम मालिक और संचालन से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
इस हादसे में जान गंवाने वाले चारों लोगों के शवों को बहरोड़ जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। वहीं गंभीर रूप से झुलसी महिला का इलाज जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के समय गोदाम में करीब सात लोग मौजूद थे, जिनमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल थे। आग फैलते ही सभी अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इसी दौरान दो नाबालिग बच्चे और एक महिला गोदाम के पिछले हिस्से में जाकर छिप गए, जहां उन्हें लगा कि वे सुरक्षित रहेंगे। लेकिन तेज गर्मी के कारण टीनशेड के लोहे के पिलर पिघलकर उन पर गिर पड़े और नीचे मौजूद प्लास्टिक कचरे में आग लग गई, जिससे वे बाहर नहीं निकल सके।
इस दौरान गोदाम में रखे केमिकल से भरे ड्रमों में एक के बाद एक जोरदार धमाके हुए, जिससे पूरा इलाका दहल उठा। स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब पांच बार तेज विस्फोट हुए, जिनकी आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी। लोगों ने आरोप लगाया कि इस अवैध गोदाम को लेकर पहले भी प्रशासन को शिकायत की गई थी, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते इतना बड़ा हादसा हो गया।