जूली ने कहा- केंद्रीय मंत्री बताएं, ऐसी कौनसी मजबूरी थी जिसने अरावली को खतरे में डाल दिया?

अलवर: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव पर जमकर हमला बोला और सवाल किया कि आखिर कौनसी मजबूरी थी, जिसने उन्हें अरावली पर्वतमाला को ही दांव पर लगाने पर मजबूर किया। जूली ने कहा कि केंद्र सरकार के हालिया फैसले से अरावली पर स्थित ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों—पांडुपोल मंदिर, नीलकंठ महादेव और करणीमाता मंदिर—की सुरक्षा को गंभीर खतरा है। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस अरावली की रक्षा के लिए प्रदेशभर में जन जागरण अभियान शुरू करेगी।

अगले हफ्ते अलवर में बड़ा जन जागरण अभियान

जूली ने बताया कि अलवर में आगामी 27 दिसंबर को एक बड़ा जन जागरण अभियान आयोजित किया जाएगा। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट, वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा, राष्ट्रीय महासचिव जितेन्द्र सिंह, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं को आमंत्रित किया गया है। जूली गुरुवार को अरावली पहाड़ी की तलहटी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से मुखातिब थे।

केंद्र की नीति पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति जिसमें कहा गया कि अरावली में कोई भी खनन गतिविधि नहीं होगी, जनता को भ्रमित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस पर आदेश दे चुका है। जूली ने विशेष रूप से उन पहाड़ियों की बात की जिन्हें अरावली पर्वतमाला से बाहर कर खनन के लिए खोला जा रहा है।

अरावली की केवल एक प्रतिशत पहाड़ियां ही 100 मीटर से ऊँची

जूली ने आशंका जताई कि केंद्र का उद्देश्य अरावली की 90 प्रतिशत पहाड़ियों को खनन के लिए खोलना है, जिससे आम जनता का जीवन प्रभावित होगा। उन्होंने सवाल किया कि ऐसी कौनसी मजबूरी है कि केंद्र सरकार अरावली का सौदा करने पर मजबूर हो रही है। जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अरावली की प्राकृतिक संपदा को अपने उद्योगपति मित्रों के हवाले करना चाहती है।

मुख्यमंत्री के प्रयासों पर सवाल

टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सवाल किया कि पिछले चार दिनों में उन्होंने अरावली को बचाने के लिए क्या किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अब खुद इस मुद्दे पर बोलने में असमर्थ हैं और जिम्मेदारी दूसरों—अरुण चतुर्वेदी या राजेन्द्र राठौड़—को दे दी गई है।

कांग्रेस का उद्देश्य स्पष्ट

जूली ने कहा कि यह मुद्दा भाजपा का नहीं है। कांग्रेस जानना चाहती है कि राजस्थान और केंद्र सरकार अरावली के संरक्षण पर क्या रुख रखते हैं। उन्होंने अलवर के दोनों मंत्रियों के स्टैंड पर भी सवाल उठाए और कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट की वजह से अरावली की परिभाषा बदली जाएगी, तो इन पहाड़ियों की रक्षा कौन करेगा। जूली ने केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव से भी जवाब मांगा कि क्या वे अरावली की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

व्यावसायिक हितों पर व्यावहारिक दृष्टिकोण की जरूरत

टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राजस्थान की प्राकृतिक संपदा—जैसे सोना, चांदी और यूरेनियम—को अपने उद्योगपति मित्रों को सौंपने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को अरावली की सुरक्षा के लिए संसद में नया बिल लाना चाहिए या सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार कराना चाहिए। जूली ने यह भी कहा कि केंद्र के पास मनरेगा का नाम बदलने का समय है, लेकिन अरावली को बचाने के लिए समय नहीं है।