एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा 960 करोड़ रुपये से जुड़े कथित जल जीवन मिशन (JJM) मामले में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को एक बार फिर अदालत में पेश किया गया। इस दौरान ACB ने उनसे दो दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग की, जिसका उनके वकीलों ने कड़ा विरोध किया। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश जारी कर दिया।
कोर्ट में ACB पर भड़के सुबोध अग्रवाल, जांच में सहयोग का दावाअदालत परिसर में सुनवाई के दौरान सुबोध अग्रवाल ने ACB की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों से सीधे सवाल करते हुए कहा कि उन पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है।
उन्होंने कहा, “मैंने जांच में पूरा सहयोग दिया है, फिर भी बार-बार मीडिया में यह क्यों कहा जा रहा है कि मैंने सवालों के जवाब नहीं दिए। कृपया बताएं कि कौन से सवाल अनुत्तरित रहे हैं?” उनके इस बयान के बाद कोर्ट परिसर में हल्की बहस की स्थिति भी देखी गई।
पूछताछ के दौरान बिगड़ी तबीयत, रिपोर्टें सामान्य आईंमंगलवार शाम पूछताछ के दौरान सुबोध अग्रवाल की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया गया। हालांकि मेडिकल रिपोर्ट में सभी पैरामीटर सामान्य पाए गए।
इसके बाद जब अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया, तो उनके वकीलों ने सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई और दावा किया कि उनके मुवक्किल की जान को खतरा हो सकता है।
वकील ने जताई गंभीर आशंका, स्पेशल सेल सुरक्षा की मांगसुबोध अग्रवाल के वकील ने अदालत में कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील और बड़े स्तर का है, जिसमें आने वाले समय में कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। ऐसे में उनके मुवक्किल को जेल में खतरा हो सकता है।
वकील ने कोर्ट से मांग की कि न्यायिक हिरासत के दौरान सुबोध अग्रवाल को विशेष सुरक्षा प्रदान की जाए और उन्हें स्पेशल सेल जैसी सुरक्षित जेल में रखा जाए, ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचाव सुनिश्चित हो सके।
जल्द आ सकता है फैसलाइस सुरक्षा संबंधी आवेदन पर अदालत ने संज्ञान लिया है और संकेत दिया है कि इस मामले में जल्द ही निर्णय सुनाया जा सकता है। फिलहाल सभी की नजर कोर्ट के आगामी आदेश पर टिकी हुई है, क्योंकि मामला अब कानूनी और सुरक्षा दोनों दृष्टिकोण से अहम हो गया है।