जलझूलनी एकादशी पर खाटूश्यामजी धाम में उमड़ेगी आस्था की भीड़, भक्तों के लिए खास इंतज़ाम

खाटूश्यामजी धाम और देशभर के मंदिरों में बुधवार को जलझूलनी एकादशी का पावन पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। श्रीश्याम मंदिर कमेटी ने सभी तैयारियां शुरू कर दी हैं और अनुमान है कि लगभग 2 से 3 लाख भक्त बाबा श्याम के दर्शन के लिए खाटूधाम पहुंचेंगे।

बाबा श्याम की नई पोशाकें होंगी प्रेषित


जलझूलनी एकादशी से पूर्व श्रीश्याम मंदिर कमेटी द्वारा खाटू और आसपास के मंदिरों में विशेष रूप से तैयार की गई पोशाकें भेजी जाती हैं। जन्माष्टमी पर जिस प्रकार प्रसाद वितरित किया जाता है, ठीक उसी तरह इस अवसर पर नई पोशाकें मंदिरों में भेजने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन्हीं पोशाकों को भगवान को धारण करवाया जाता है।

प्राचीन परंपरा का निर्वाह

माना जाता है कि पुराने समय में यह जिम्मेदारी राजा-महाराजाओं की होती थी। वे स्वयं या उनके प्रतिनिधि मंदिरों तक पोशाकें पहुंचाते थे। समय बदलने के साथ आज यह परंपरा श्रीश्याम मंदिर कमेटी निभा रही है। भक्तों का विश्वास है कि बाबा श्याम ही आज खाटू के नरेश हैं, और उन्हीं के आदेश पर ये पोशाकें अन्य मंदिरों तक पहुंचाई जाती हैं।
जलझूलनी एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं में जलझूलनी एकादशी को अत्यंत पवित्र माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में करवट बदलते हैं और उनके इस दिव्य स्वरूप का पूजन करने से पापों का नाश होता है। इसे परिवर्तिनी एकादशी, वामन एकादशी और पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

मोक्ष और पुण्य की प्राप्ति


जलझूलनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। इस उपवास से सभी पाप मिट जाते हैं और साधक को भगवान विष्णु के परमधाम बैकुंठ की प्राप्ति होती है। परंपरा के अनुसार, इस दिन विभिन्न नगरों और ग्रामों में गोपीनाथ राजा भगवान का जलविहार आयोजन होता है। गाजे-बाजे और भक्तिमय माहौल में भगवान मंदिर से बाहर निकलकर जलविहार करते हैं और नई पोशाक धारण कर पुनः मंदिर में विराजमान होते हैं।