जयपुर में ड्रग कंट्रोल विभाग का बड़ा एक्शन, निजी अस्पताल से अवैध इंजेक्शन व दस्तावेज बरामद

जयपुर: राजधानी में ड्रग कंट्रोल विभाग और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) की संयुक्त टीम ने गोपालपुरा बाइपास स्थित एक निजी अस्पताल पर छापा मारकर अवैध दवा कारोबार का बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि अस्पताल में तैनात एक सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर और उसके एक कर्मचारी ने मिलकर तीन अलग-अलग इंजेक्शनों को मिलाकर ‘ट्राइमेक्स’ नाम का अवैध इंजेक्शन तैयार किया, जिसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बेचा जा रहा था। हैरानी की बात यह है कि यह दवा ड्रग विभाग में पंजीकृत ही नहीं थी। आरोपियों ने ‘OH! MAN’ नाम से एक फर्जी ऑनलाइन फार्मेसी और वेबसाइट भी बना रखी थी, जिसका कोई आधिकारिक रजिस्ट्रेशन नहीं था। इस अवैध नेटवर्क के जरिए दवाओं की सप्लाई गुजरात तक की जा रही थी। मौके से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं और डॉक्टर के खिलाफ राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में कार्रवाई की सिफारिश की जा रही है।

दिल्ली से मिली सूचना पर हुई बड़ी छापेमारी

औषधि नियंत्रक अजय फाटक ने जानकारी दी कि दिल्ली स्थित ड्रग्स कंट्रोलर जनरल से इनपुट मिला था कि जयपुर से बड़ी मात्रा में अवैध दवाएं गुजरात भेजी जा रही हैं। इसी सूचना के आधार पर राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग ने यह संयुक्त कार्रवाई की। टीम ने छापेमारी के दौरान अस्पताल से कई दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए, जिनकी जांच जारी है। विभाग अब संबंधित डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए राजस्थान मेडिकल काउंसिल को औपचारिक पत्र भेजने की तैयारी कर रहा है।
तीन दवाओं के मिश्रण से तैयार किया जाता था ‘ट्राइमेक्स’ इंजेक्शन

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि ‘ट्राइमेक्स’ नाम का यह इंजेक्शन वास्तव में तीन अलग-अलग दवाओं—पापावेरिन, एल्प्रोस्टैडिल और क्लोरप्रोमेजिन—को मिलाकर तैयार किया जाता था। इन दवाओं की छोटी-छोटी मात्रा मिलाकर इसे बनाया जाता था और फिर यौन समस्याओं के इलाज के नाम पर मरीजों को दिया जाता था।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी चिकित्सक द्वारा मरीज के इलाज के दौरान इस तरह का मिश्रण तैयार करना अलग बात है, लेकिन इसे एक ब्रांड नाम देकर बाजार में बेचना पूरी तरह गैरकानूनी है। सबसे अहम बात यह है कि ‘ट्राइमेक्स’ नाम से कोई भी इंजेक्शन ड्रग विभाग में पंजीकृत नहीं है, इसलिए इसका व्यावसायिक उपयोग नियमों का गंभीर उल्लंघन है।

फर्जी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हो रही थी अवैध बिक्री

ड्रग कंट्रोल विभाग के अनुसार, यह पूरा कारोबार ‘OH! MAN’ नाम के एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित किया जा रहा था। इसके लिए ‘Ohman Pharmacy’ नाम से एक फर्जी डिजिटल फार्मेसी बनाई गई थी, जिसका कोई वैध रजिस्ट्रेशन नहीं था।

जांच में सामने आया कि अस्पताल में कार्यरत मनीष कुमार सोनी इस पूरे अवैध नेटवर्क को चला रहा था और वही ऑनलाइन माध्यम से इंजेक्शन की बिक्री करता था। सभी भुगतान उसके व्यक्तिगत बैंक खाते में लिए जा रहे थे। टीम ने मोबाइल नंबर और बैंक ट्रांजेक्शन के आधार पर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया और आरोपी तक पहुंचने में सफलता हासिल की।