राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र सौंपने की जानकारी देना देशभर के लाखों छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और छात्र एकता की बड़ी जीत का प्रतीक है। बेनीवाल ने कहा कि लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष कर रहे युवाओं की आवाज आखिरकार सरकार तक पहुंची है।
प्रधानमंत्री से स्थिति स्पष्ट करने की मांगहनुमान बेनीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि वे बिना किसी देरी के देश के सामने आकर इस पूरे घटनाक्रम पर स्थिति स्पष्ट करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को सार्वजनिक रूप से यह बताना चाहिए कि सरकार ने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उनके अनुसार इस मुद्दे पर सरकार की ओर से स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी सामने आना आवश्यक है, ताकि देश के युवाओं के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
वीडियो संदेशों पर भी साधा निशानाआरएलपी प्रमुख ने प्रधानमंत्री के वीडियो संदेशों का जिक्र करते हुए भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार वीडियो संदेशों के जरिए युवाओं के हितों की बात करती रही, लेकिन यदि वास्तव में युवाओं को सकारात्मक संदेश देना उद्देश्य होता तो धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने की प्रतीक्षा करने के बजाय उन्हें पहले ही पद से हटा दिया जाता। बेनीवाल ने कहा कि इससे सरकार की मंशा पर उठ रहे सवालों का भी समय रहते जवाब मिल जाता।
नैतिक जिम्मेदारी निभाने की दी सलाहहनुमान बेनीवाल ने धर्मेंद्र प्रधान की नैतिक जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा मंत्री नैतिक आधार पर फैसला लेते तो आंदोलन की शुरुआत में ही अपने पद से इस्तीफा दे देते। उनके अनुसार जब नीट धांधली और पेपर लीक मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई थी, तभी निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्हें पद छोड़ देना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और शिक्षा मंत्री के अड़ियल रवैये के कारण जंतर-मंतर से लेकर संसद भवन तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों छात्रों और युवाओं को लाठीचार्ज तथा अन्य कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
संसद का समय बर्बाद होने का लगाया आरोपकेंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए सांसद बेनीवाल ने कहा कि सरकार की जिद और फैसले में हुई देरी का असर संसद के मानसून सत्र पर भी पड़ा। उनके मुताबिक पहले सप्ताह का अधिकांश समय हंगामे की भेंट चढ़ गया और महत्वपूर्ण संसदीय कार्य प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार समय रहते निर्णय लेती तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था। बेनीवाल ने दोहराया कि अंततः देशभर के युवाओं की एकजुटता, लोकतांत्रिक संघर्ष और लगातार बने जनदबाव के आगे सरकार को झुकना पड़ा, जिसे उन्होंने छात्र शक्ति और लोकतंत्र की महत्वपूर्ण जीत बताया।