'गौ माता ही नहीं, बेटियों को भी बचाओ, तभी समाज सुरक्षित रहेगा' : आचार्य धीरेंद्र शास्त्री

कोटा: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की रामगंजमंडी में आयोजित श्री गौ माता महोत्सव और राम कथा का तीसरा दिन रविवार को सम्पन्न हुआ। इस दौरान राम कथा में बाबा रामदेव भी उपस्थित रहे। आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हमें केवल गौ रक्षक नहीं बनना है, बल्कि गौ सेवक भी बनना होगा। उन्होंने कहा, हमें गाय, गंगा, गायत्री, गीता और गुरू को बचाना है। इसके साथ-साथ बेटियों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। बेटियों को दुर्गा और काली का रूप दें। तभी हमारा समाज सुरक्षित रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि हनुमान जी की सेवा और पूजा करने से जीवन में महासुख की प्राप्ति होती है। उन्होंने समझाया, दुख से मुक्ति पाना सुख है, लेकिन निरंतर सुख का अनुभव महासुख कहलाता है।

माता-पिता की सेवा पर जोर


रामगंजमंडी में तीन दिन चली कथा के दौरान आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन देते हुए कहा कि उन्होंने इतनी श्रद्धा और भव्य भीड़ कहीं नहीं देखी। उन्होंने स्पष्ट किया, पानी में डूबने से मृत्यु निश्चित है, लेकिन भक्ति में डूबने से मोक्ष निश्चित है। बेटों को सलाह है कि चाहे हमारी कथा सुनें या नहीं, पर मां-बाप की सेवा अवश्य करें। योग करना या न करना आपकी मर्जी है, लेकिन दूसरों की मदद करना अनिवार्य है। कथा समापन के बाद आचार्य धीरेंद्र शास्त्री सड़क मार्ग से झालावाड़ की कोलाना हवाई पट्टी पहुंचे और वहां से मुंबई के लिए विशेष विमान से रवाना हुए।

गौ माता की सेवा कौन करेगा?

अपने संबोधन में बाबा रामदेव ने कहा कि गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 100 करोड़ से अधिक सनातनी हिंदू गौ माता की पूजा करते हैं, इसलिए वह राष्ट्रमाता अवश्य हैं। गो हत्या पर कानून बनने के बाद यह कलंक भी धीरे-धीरे मिट रहा है, लेकिन सवाल यह है कि गौ माता की सेवा कौन करेगा? बाबा रामदेव ने गांवों में गोचर भूमि की सुरक्षा और समिति गठन की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग गौ माता की रक्षा और उन्हें विश्व माता बनाने की बात करते हैं, वे स्वयं गौ माता की सेवा नहीं करते। उन्होंने स्वदेशी उत्पादों के उपयोग से आत्मनिर्भर भारत बनने पर भी जोर दिया।

भारत माता को मानने वाले सभी एक हैं

कथा के यजमान और शिक्षा एवं पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि आचार्य धीरेंद्र शास्त्री के दरबार में पहले बड़े भामाशाह और राजनेता आरती किया करते थे, लेकिन इस बार उन्होंने सासी, नट, गाड़िया लोहार, कालबेलिया और घुमंतू जातियों के लोगों के साथ आरती करवाई। उन्होंने कहा कि सेना के जवानों ने भी आरती में भाग लिया। पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं ने यह संदेश दिया कि भारत माता को मानने वाले सभी लोग एकजुट हैं। तीसरे दिन कार्यक्रम में दाती महाराज, विधायक ललित मीणा, राधेश्याम बैरवा समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से पहुंचे।