देश में हर वर्ष होने वाली सड़क दुर्घटनाएं हजारों परिवारों की जिंदगी बदल देती हैं। समय पर इलाज न मिल पाने के कारण अनेक घायल अपनी जान गंवा देते हैं। इसी गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने सड़क हादसे के शिकार लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। शनिवार को सरकार ने ‘पीएम राहत’ योजना की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित और व्यवस्थित आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस योजना की घोषणा करते हुए बताया कि भारत में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें समय पर उपचार न मिलने से मृत्यु दर बढ़ जाती है। मंत्रालय द्वारा उद्धृत एक अध्ययन के अनुसार, यदि किसी घायल व्यक्ति को हादसे के पहले “गोल्डन ऑवर” यानी पहले एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो लगभग 50 प्रतिशत मौतों को रोका जा सकता है। यही कारण है कि इस योजना का फोकस त्वरित चिकित्सा पहुंच सुनिश्चित करना है।
‘सेवा तीर्थ’ से पहला बड़ा निर्णयमंत्रालय के बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय के ‘सेवा तीर्थ’ भवन में स्थानांतरित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले निर्णय के रूप में इस महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी। सरकार का कहना है कि यह कदम आम नागरिकों, विशेषकर कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के प्रति संवेदनशीलता और सुरक्षा की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
‘पीएम राहत’ योजना के अंतर्गत किसी भी पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ित को हादसे की तारीख से अगले सात दिनों तक अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। इससे परिजनों पर तत्काल आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा और उपचार बिना देरी के शुरू हो सकेगा।
गंभीर और सामान्य मामलों के लिए अलग प्रावधानसरकार ने योजना में इलाज की अवधि को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है। गंभीर दुर्घटना के मामलों में पीड़ित को 48 घंटे तक प्राथमिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि अपेक्षाकृत कम गंभीर मामलों में 24 घंटे तक उपचार सुनिश्चित किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि शुरुआती समय में जीवन रक्षक उपचार में किसी प्रकार की बाधा न आए।
मंत्रालय का मानना है कि दुर्घटना के बाद के शुरुआती घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में अस्पतालों, एम्बुलेंस सेवाओं और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना इस योजना का प्रमुख आधार है। इससे आपात स्थिति में निर्णय लेने और मरीज को अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया तेज होगी।
112 हेल्पलाइन से मिलेगी त्वरित सहायतायोजना के तहत आपातकालीन सहायता प्राप्त करना भी बेहद सरल बनाया गया है। यदि कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना का शिकार होता है, तो वह स्वयं, कोई राहगीर या मौके पर मौजूद अन्य व्यक्ति 112 आपातकालीन नंबर पर कॉल कर सकता है। इस नंबर पर संपर्क करने के बाद कॉलर को निकटतम अस्पताल और उपलब्ध एम्बुलेंस की जानकारी दी जाएगी।
यह प्रणाली इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम, स्थानीय पुलिस और चिकित्सा संस्थानों के बीच समन्वय को मजबूत करती है। इससे दुर्घटना स्थल से अस्पताल तक पहुंचने की प्रक्रिया तेज और व्यवस्थित बनती है, जिससे घायल व्यक्ति को समय रहते इलाज मिल सके।
आर्थिक चिंता से मिलेगी राहतअक्सर देखा गया है कि दुर्घटना के तुरंत बाद परिवारजन इलाज के खर्च को लेकर असमंजस में पड़ जाते हैं, जिससे उपचार में देरी हो सकती है। ‘पीएम राहत’ योजना इस समस्या का समाधान प्रस्तुत करती है। कैशलेस सुविधा के कारण अस्पताल में भर्ती और उपचार की प्रक्रिया बिना अग्रिम भुगतान के शुरू हो सकेगी।
सरकार का मानना है कि यह पहल न केवल मृत्यु दर को कम करने में सहायक होगी, बल्कि सड़क सुरक्षा के व्यापक लक्ष्य की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। समय पर चिकित्सा सुविधा और आर्थिक सहायता का यह संयोजन दुर्घटना पीड़ितों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता है।
इस प्रकार ‘पीएम राहत’ योजना सड़क हादसे में घायल व्यक्तियों को त्वरित, संगठित और आर्थिक रूप से सुरक्षित चिकित्सा सहायता प्रदान करने की दिशा में एक अहम प्रयास है। यदि इस व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले समय में अनेक जिंदगियां बचाई जा सकती हैं और सड़क सुरक्षा तंत्र को नई मजबूती मिल सकती है।