परिसीमन और महिला आरक्षण पर विपक्ष पर बरसे गजेंद्र सिंह शेखावत, बोले- विपक्ष फिर होगा बेनकाब

जोधपुर। संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की राजनीति और उसका दोहरा रवैया पहले भी देश के सामने उजागर हो चुका है और आने वाले सत्र में एक बार फिर उसकी वास्तविक सोच सामने आ जाएगी। शुक्रवार को जोधपुर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान शेखावत ने कहा कि विपक्ष लगातार इन मुद्दों पर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है, जबकि संवैधानिक प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट है।

उन्होंने कहा कि देश की बढ़ती जनसंख्या के कारण लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। संविधान निर्माताओं ने इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए परिसीमन की व्यवस्था पहले से ही तय कर दी थी। वर्ष 2008 में लागू हुए परिसीमन अधिनियम में भी यह प्रावधान किया गया था कि वर्ष 2025 के बाद नई जनगणना और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर दोबारा परिसीमन किया जाएगा। शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं को केवल निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा ही नहीं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका में भी देखना चाहते हैं। उनका कहना था कि महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने और विधायिकाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया आवश्यक है।

महिला आरक्षण पर विपक्ष की भूमिका पर उठाए सवाल

केंद्रीय मंत्री ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर विपक्ष के रुख पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पिछले संसद सत्र में जब महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्ताव सदन में आए थे, तब विपक्ष का वास्तविक चेहरा देश ने देखा था। उनके अनुसार विपक्ष महिलाओं को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के मुद्दे पर गंभीर नहीं है और उसका व्यवहार इस बात का प्रमाण है।

शेखावत ने कहा कि संसद का मानसून सत्र शुरू होने के बाद बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में विभिन्न दलों के प्रतिनिधि चर्चा करेंगे और सर्वसम्मति बनने के बाद विधायी कार्य आगे बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के दौरान विपक्ष का दोहरा रवैया एक बार फिर जनता के सामने उजागर होगा।
रेलवे आधुनिकीकरण को बताया ऐतिहासिक उपलब्धि

केंद्रीय मंत्री ने देश में रेलवे अवसंरचना के विस्तार और आधुनिकीकरण को लेकर भी केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और रेलवे क्षेत्र में बड़े स्तर पर परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि देशभर के लगभग 1,500 रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण का कार्य पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जालंधर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम से देश के 50 रेलवे स्टेशनों का एक साथ वर्चुअल उद्घाटन करेंगे। इस परियोजना में राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर सहित कुल आठ प्रमुख रेलवे स्टेशन भी शामिल हैं।

शेखावत ने कहा कि जैसलमेर उनके लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह उनकी जन्मभूमि होने के साथ-साथ लंबे समय तक उनकी कर्मभूमि भी रहा है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस शहर में ऐसे ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है।

जोधपुर और राजस्थान में विकास कार्यों का किया उल्लेख

गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए देशभर में आधारभूत ढांचे का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्गों, रेलवे और हवाई अड्डों के क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। उनके अनुसार भारतीय रेलवे का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है और अब हाइड्रोजन तकनीक से संचालित ट्रेनों की शुरुआत भी हो रही है। साथ ही देश में हवाई अड्डों की संख्या पहले की तुलना में दोगुने से अधिक हो चुकी है।

उन्होंने जोधपुर और आसपास के क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि जोधपुर का नया एयरपोर्ट आधुनिक सुविधाओं से लैस है। वहीं जोधपुर और फलौदी रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जबकि रामदेवरा रेलवे स्टेशन का पुनर्निर्माण जारी है। उन्होंने कहा कि जोधपुर और जैसलमेर को रेलवे मेंटेनेंस, वॉशिंग, परिचालन और रखरखाव के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिन पर लगभग एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा रहा है। शेखावत ने यह भी बताया कि पिछले 14 वर्षों में जोधपुर को 42 से अधिक नई रेल सेवाएं मिली हैं। अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र के विकास से जुड़े जिन भी प्रस्तावों को केंद्र सरकार के समक्ष रखा गया, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति देकर आगे बढ़ाया गया।