राजस्थान के अजमेर से सामने आई एक दुखद घटना ने एक बार फिर बच्चों में बढ़ती मोबाइल निर्भरता और मानसिक संवेदनशीलता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आदर्श नगर थाना इलाके में मोबाइल फोन को लेकर हुए मामूली विवाद के बाद आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र ने कथित तौर पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है, वहीं पुलिस मामले की गंभीरता से जांच में जुटी हुई है।
मोबाइल वापस लेने की बात से नाराज हुआ छात्रपुलिस के अनुसार मृतक छात्र अपने बड़े भाई का एंड्रॉयड मोबाइल अक्सर इस्तेमाल करता था। उसका बड़ा भाई हाल ही में दसवीं की परीक्षा पूरी कर छुट्टियों में घर आया था। छोटा भाई उसी फोन पर यूट्यूब वीडियो देखता और सोशल मीडिया चलाता था। शुक्रवार शाम भी वह मोबाइल में व्यस्त था, तभी बड़े भाई के एक दोस्त का कॉल आया। बातचीत के बाद बड़े भाई ने उससे फोन वापस मांगा ताकि वह बाहर जा सके।
बताया जा रहा है कि मोबाइल वापस लेने की बात छोटे भाई को बेहद बुरी लगी। इसी बात से नाराज होकर वह बिना कुछ कहे घर के दूसरे कमरे में चला गया। परिवार के लोगों को उस समय अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही देर में इतना बड़ा हादसा हो जाएगा।
कुछ ही मिनटों में बदली घर की खुशियां मातम मेंकरीब 20 मिनट तक जब छोटा भाई कमरे से बाहर नहीं निकला तो बड़े भाई को चिंता हुई। उसने कमरे का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। दरवाजा बंद होने पर उसे शक हुआ। जब उसने नीचे से झांककर देखा तो अंदर का दृश्य देखकर उसके होश उड़ गए। छात्र कमरे में फंदे से लटका हुआ था।
घटना के समय माता-पिता घर पर मौजूद नहीं थे। दोनों काम के सिलसिले में बाहर गए हुए थे, जबकि घर में दादी और अन्य परिजन मौजूद थे। परिवार ने तुरंत आसपास के लोगों और पुलिस को सूचना दी।
मौके पर पहुंची पुलिस और एफएसएल टीमघटना की जानकारी मिलते ही आदर्श नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। साथ ही एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया। पुलिस ने कमरे से जरूरी साक्ष्य जुटाए और पूरे घटनाक्रम की पड़ताल शुरू कर दी है।
थाना प्रभारी छोटूलाल ने बताया कि शुरुआती जांच में मामला मोबाइल फोन की लत और उससे उपजी भावनात्मक नाराजगी से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। हालांकि पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और मेडिकल बोर्ड की निगरानी में पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा।
बच्चों में बढ़ती मोबाइल लत ने बढ़ाई चिंताइस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कम उम्र में मोबाइल और सोशल मीडिया की बढ़ती लत बच्चों के मानसिक व्यवहार को किस तरह प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि डिजिटल डिवाइस पर अत्यधिक निर्भरता बच्चों को भावनात्मक रूप से कमजोर बना सकती है।
फिलहाल पुलिस परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके। वहीं इस दर्दनाक घटना के बाद परिवार गहरे सदमे में है और इलाके में शोक का माहौल बना हुआ है।