अजमेर के इस गांव में नहीं होगी ईद की खुशियां, खामेनेई के निधन पर शिया समाज मनाएगा शोक

अजमेर जिले के पास स्थित दौराई गांव इस बार एक अलग ही वजह से चर्चा में है। जहां देशभर में ईद की तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं इस गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। यहां रहने वाले शिया समुदाय ने इस बार ईद का त्योहार न मनाने का फैसला लिया है। इसकी वजह ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर को बताया जा रहा है, जिसके चलते पूरे समुदाय में शोक का माहौल है।

हर साल जहां इस मौके पर गांव की गलियां चहल-पहल से भर जाती थीं, इस बार वहां खामोशी दिखाई दे रही है। आमतौर पर ईद के दौरान बाजारों में खरीदारी की भीड़, घरों में पकवानों की खुशबू, बच्चों के नए कपड़े और रोशनी से सजी सड़कों का नजारा देखने को मिलता था। लेकिन इस बार समाज के सामूहिक निर्णय के बाद इन सभी तैयारियों पर विराम लग गया है और गांव का माहौल पूरी तरह बदल चुका है।
शिया समुदाय के लोगों ने यह तय किया है कि वे इस बार किसी भी प्रकार का जश्न नहीं मनाएंगे। इसके बजाय वे शोक प्रकट करने के लिए सादगी अपनाएंगे। लोग काली पट्टी बांधकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करेंगे और सामूहिक रूप से अपने धर्मगुरु को श्रद्धांजलि देंगे। इस फैसले के बाद गांव में सामान्य दिनों जैसी गतिविधियां भी सीमित हो गई हैं और हर ओर गंभीरता का वातावरण नजर आ रहा है।

इस बीच, गांव की रोजा मस्जिद में मौलाना इरफान हैदर की अगुवाई में एक शोक सभा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सभा के दौरान समुदाय के लोगों ने दिवंगत नेता को याद किया और उनके विचारों व सिद्धांतों पर चलने का संकल्प लिया। लोगों ने इसे एकजुटता और श्रद्धांजलि का प्रतीक बताया।

मौलाना इरफान हैदर ने अपने संबोधन में कहा कि यह समय उत्सव का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और दुख साझा करने का है। उन्होंने समुदाय से अपील की कि सभी लोग एकजुट रहकर सादगी और शांति के साथ इस कठिन समय को बिताएं। उनके इस संदेश के बाद गांव में शोक का माहौल और गहरा गया है, जिससे इस बार ईद की खुशियां पूरी तरह फीकी पड़ गई हैं।