'दीपके आंदोलन से सरकार को चुनौती दे रहा है और आप पदों के लिए...', अपने कार्यकर्ताओं पर भड़के उद्धव ठाकरे

मुंबई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे अपनी ही पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की आपसी खींचतान से नाराज नजर आए। पार्टी की एक अहम बैठक के दौरान उन्होंने संगठन में बढ़ती गुटबाजी पर कड़ी नाराजगी जताई और नेताओं को अनुशासन बनाए रखने की नसीहत दी। इस दौरान उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके का उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी नेताओं को उनसे सीख लेनी चाहिए, जो आंदोलन के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी बात रख रहे हैं।

बैठक में जताई नाराजगी, कार्यकर्ताओं को दी सीख

ANI के अनुसार, उद्धव ठाकरे ने बैठक के दौरान कहा कि जब देश में एक युवा नेता आंदोलन के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने का प्रयास कर रहा है, तब उनकी पार्टी के लोग संगठन मजबूत करने के बजाय पदों को लेकर आपस में उलझे हुए हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर उठकर संगठन के हित में काम करना चाहिए।

बताया जा रहा है कि उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, देश में अभिजीत दीपके जैसा एक युवा आंदोलन कर रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती दे रहा है, जबकि आप लोग यहां पदों के लिए आपस में लड़ रहे हैं। उनके इस बयान को बैठक में मौजूद नेताओं के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।

उद्धव ठाकरे के सामने ही भिड़ गए दो गुट

जानकारी के मुताबिक, ठाणे जिले में संगठन को मजबूत करने और नए पदाधिकारियों की नियुक्ति पर चर्चा के लिए 'मातोश्री' में बैठक बुलाई गई थी। इसी दौरान ठाणे के दो अलग-अलग गुटों के पदाधिकारियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया।

उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में हुए इस विवाद से वे काफी नाराज हो गए और उन्होंने दोनों पक्षों को फटकार लगाते हुए संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया।
कलवा और कल्याण संगठन को लेकर हो रही थी समीक्षा

सूत्रों के अनुसार, यह बैठक मुख्य रूप से ठाणे जिले के कलवा और कल्याण विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी संगठन की स्थिति की समीक्षा के लिए आयोजित की गई थी। इसी दौरान कल्याण क्षेत्र में कुछ पदाधिकारियों को पार्टी से निष्कासित किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया, जिसके बाद बैठक में विवाद गहरा गया।

बताया जा रहा है कि पुराने और नए पदाधिकारियों के बीच लंबे समय से चल रहे मतभेद इस टकराव की बड़ी वजह बने। संगठनात्मक जिम्मेदारियों और पदों को लेकर दोनों पक्षों के बीच असहमति खुलकर सामने आ गई।

निष्कासन के फैसले पर भी हुआ विवाद

सूत्रों का कहना है कि दो दिन पहले कल्याण लोकसभा क्षेत्र में शिवसेना (यूबीटी) के कुछ प्रमुख पदाधिकारियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया था। उसी फैसले को लेकर बैठक में सवाल उठाए गए और कई नेताओं ने अपनी नाराजगी जाहिर की। इसी मुद्दे ने बाद में तीखी बहस का रूप ले लिया।

उद्धव ठाकरे ने इस दौरान सभी नेताओं से आंतरिक मतभेद भुलाकर संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देने की अपील की और स्पष्ट किया कि पार्टी हित से ऊपर कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं हो सकती।

कई वरिष्ठ नेता रहे बैठक में मौजूद

उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में ठाणे जिला प्रमुख केदार दिघे, कल्याण लोकसभा संपर्क प्रमुख गुरुनाथ खोत, विधायक मिलिंद नार्वेकर, पूर्व विधायक विलास पोतनीस सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे।

अब इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि ठाणे जिले में जारी गुटबाजी को खत्म करने और संगठनात्मक अनुशासन बहाल करने के लिए उद्धव ठाकरे आगे क्या कदम उठाते हैं। पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को लेकर भी राजनीतिक गलियारों की नजर आगामी फैसलों पर टिकी हुई है।