लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर 'इडियट' शब्द इस्तेमाल करने के मामले में लोकसभा सचिवालय की ओर से दो नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस में राहुल गांधी पर सदन की संसदीय मर्यादा और नियमों का पालन नहीं करने तथा असंसदीय भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। राहुल गांधी से इस मामले में जवाब मांगा गया है।
इस बीच शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने राहुल गांधी का बचाव करते हुए नोटिस जारी किए जाने पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने पूछा कि 'इडियट' शब्द को असंसदीय कब से माना जाने लगा। राउत ने इस मुद्दे पर सरकार और गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी तीखी टिप्पणी की।
संजय राउत ने नोटिस पर उठाया सवालसंजय राउत ने राहुल गांधी को भेजे गए नोटिस पर सवाल करते हुए कहा कि किसी को 'इडियट' कहना असंसदीय शब्द है या नहीं, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने बयान में गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी कई आरोप लगाए और कहा कि यदि कोई मंत्री संसद में उपस्थित होकर सवालों का जवाब नहीं देता है तो उसके लिए क्या शब्द इस्तेमाल किया जाएगा।
राउत ने 'इडियट' शब्द को लेकर आमिर खान की फिल्म '3 इडियट्स' का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि अगर यह शब्द असंसदीय है तो फिल्म को सेंसर की मंजूरी कैसे मिली।
उन्होंने आगे कहा कि 'स्टुपिडिटी' असंसदीय शब्द नहीं है और राहुल गांधी को नोटिस दिया जाना सरकार की बेवकूफी है। राउत ने राहुल गांधी के सच बोलने में कुछ गलत नहीं होने की बात भी कही।
बीजेपी नेताओं पर भी की टिप्पणीसंजय राउत ने अपने बयान के दौरान बीजेपी के कुछ नेताओं का नाम लेते हुए उन्हें भी 'इडियट' कहा। उन्होंने दावा किया कि ऐसे ही लोग सरकार चला रहे हैं और इसे 'इडियट की कैबिनेट' बताया। राउत की इन टिप्पणियों के बाद मामला और राजनीतिक रूप से गरमा गया है।
क्या है राहुल गांधी को नोटिस भेजने का मामला?यह विवाद संसद में पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी की टिप्पणी से जुड़ा है। संदर्भ सामग्री के अनुसार, राहुल गांधी ने एक छात्र का हवाला देते हुए 'इडियट' और 'अंधभक्त' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। सत्तापक्ष ने इन शब्दों पर आपत्ति जताई थी।
इसके बाद बीजेपी सांसद अनुराग सिंह ठाकुर और संजय जायसवाल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष शिकायत की थी। शिकायत के बाद लोकसभा की संबंधित समिति की ओर से राहुल गांधी को नोटिस भेजा गया।
राहुल गांधी से 28 अगस्त 2026 तक अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। नोटिस में संसदीय नियमों और सदन में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा से जुड़े प्रावधानों का हवाला दिया गया है।
वंदे मातरम विवाद पर भी राउत ने साधा निशानासंजय राउत ने वंदे मातरम को लेकर चल रहे विवाद पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के छह पैरा हैं और कानून में छह पंक्तियों को अनिवार्य किया गया है। राउत ने दावा किया कि जब इससे जुड़ा कानून पारित हो रहा था, तब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में मौजूद नहीं थे।
राउत ने इसे ही वंदे मातरम का सबसे बड़ा अपमान बताया। इससे पहले पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में भी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि क्या मोदी और अमित शाह टेलीप्रॉम्प्टर के बिना वंदे मातरम की छह पंक्तियां बिना गलती के गाकर दिखा सकते हैं।