'यह किला हिंदुओं का है, मुसलमानों का प्रवेश वर्जित', सिंहगढ़ किले पर लगे पोस्टर से मचा बवाल

पुणे: महाराष्ट्र के प्रसिद्ध ऐतिहासिक पर्यटन स्थल सिंहगढ़ किले पर मंगलवार को एक विवादित पोस्टर लगाए जाने के बाद हड़कंप मच गया। पोस्टर में दावा किया गया था कि यह किला हिंदुओं का है और यहां मुसलमानों के प्रवेश पर रोक है। पोस्टर सामने आते ही प्रशासन हरकत में आया और वन विभाग ने बिना देरी किए उसे हटा दिया। हालांकि, इस मामले में अभी तक किसी भी व्यक्ति या संगठन की ओर से पुलिस में आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। इसके बावजूद संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

प्रवेश द्वार के पास लगाया गया था पोस्टर

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार सुबह निरीक्षण के दौरान किले के मुख्य प्रवेश द्वार के समीप पार्किंग क्षेत्र के पास लगे एक पुराने लोहे के सूचना बोर्ड पर यह पोस्टर चिपका हुआ मिला। सूचना मिलते ही विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पोस्टर को तुरंत हटा दिया, ताकि किसी तरह का विवाद या भ्रम की स्थिति पैदा न हो।

वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर ऐसा प्रतीत होता है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने तड़के अंधेरे का फायदा उठाकर पहले से तैयार पोस्टर वहां चिपका दिया और मौके से फरार हो गया। फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस हरकत के पीछे कौन लोग शामिल थे।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई तस्वीरें

मराठी भाषा में लिखे इस पोस्टर की तस्वीरें कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। पोस्टर के आखिर में हुकुमावरून शब्द लिखा गया था, जिसका अर्थ आदेशानुसार होता है।

वन विभाग का मानना है कि इस शब्द का इस्तेमाल जानबूझकर किया गया, ताकि लोगों को यह भ्रम हो कि पोस्टर किसी सरकारी विभाग या अधिकृत संस्था की ओर से लगाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह शरारती तत्वों की सोची-समझी कोशिश हो सकती है, जिसका उद्देश्य लोगों को गुमराह करना और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना था।
इतिहास और विरासत का प्रतीक है सिंहगढ़ किला

सिंहगढ़ किला महाराष्ट्र के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। यह किला छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास और प्रसिद्ध सिंहगढ़ युद्ध से जुड़ा हुआ है। हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक और इतिहास प्रेमी यहां पहुंचते हैं। यही वजह है कि इस स्थल का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व बेहद खास माना जाता है।

वर्तमान में किले और इसके आसपास का वन क्षेत्र राज्य के वन विभाग के अधीन आता है, जिसकी देखरेख और सुरक्षा की जिम्मेदारी विभाग के पास है।

शिकायत नहीं, फिर भी पुलिस ने शुरू की जांच


पुणे ग्रामीण पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल इस मामले में किसी भी व्यक्ति या संगठन की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। इसके बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतः जांच शुरू कर दी है।

अधिकारियों के मुताबिक, किले तक जाने वाले मार्ग और प्रवेश द्वार के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पोस्टर किसने और कब लगाया। जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस का कहना है कि किसी भी कीमत पर सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने या धार्मिक भावनाएं भड़काने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।