NCP के विलय की चर्चाओं के बीच BJP का बड़ा दांव, दोनों गुटों को केंद्र में मंत्री पद का ऑफर?

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (NCP-SP) के संभावित विलय को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जोरों पर हैं। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (BJP) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को और मजबूत करने की रणनीति के तहत दोनों गुटों को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रही है। बताया जा रहा है कि इस कवायद के तहत दोनों खेमों को केंद्र सरकार में प्रतिनिधित्व बढ़ाने का प्रस्ताव भी दिया गया है।

हालांकि, इस संभावित विलय की राह आसान नहीं मानी जा रही। पार्टी के भीतर नेतृत्व, संगठन और भविष्य की भूमिका को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र के दिवंगत पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार और उनके बेटे, राज्यसभा सांसद पार्थ पवार, इस प्रस्तावित एकीकरण के पक्ष में नहीं हैं।

सूत्रों के अनुसार, सुनेत्रा पवार के करीबी लोगों का मानना है कि यदि दोनों गुटों का विलय होता है, तो शरद पवार और सुप्रिया सुले दोबारा पार्टी पर अपना प्रभाव मजबूत कर सकते हैं। यही वजह है कि मां-बेटे की जोड़ी इस प्रस्ताव को लेकर सहज नहीं है। दूसरी ओर, एनसीपी के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में विधायक दोनों गुटों के एक होने के पक्ष में बताए जा रहे हैं।

महाराष्ट्र में लगातार हो रही हैं अहम बैठकें

राजनीतिक हलकों में चल रही इन चर्चाओं के बीच पिछले कुछ दिनों में कई अहम बैठकों ने भी अटकलों को और हवा दी है। मंगलवार रात एनसीपी (एसपी) के नेता जयंत पाटिल ने विरोधी गुट के नेताओं प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास पर मुलाकात की।

इसके बाद गुरुवार रात जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके सरकारी आवास पर बातचीत की। इसी दिन शाम को पार्थ पवार ने भी मुख्यमंत्री फडणवीस से मुलाकात कर यह जानने की कोशिश की कि अन्य नेताओं के साथ क्या चर्चा हुई है। हालांकि, फडणवीस ने कथित तौर पर इस विषय पर विस्तार से बात करने से इनकार करते हुए कहा कि वह इस मुद्दे पर सीधे सुनेत्रा पवार से चर्चा करेंगे।
सुनेत्रा पवार रख सकती हैं ये शर्तें

यदि भविष्य में दोनों गुटों के विलय पर सहमति बनती है, तो सुनेत्रा पवार का खेमा कुछ अहम शर्तें सामने रख सकता है। सूत्रों के मुताबिक, उनकी पहली मांग यह हो सकती है कि महाराष्ट्र सरकार में सुनेत्रा पवार उपमुख्यमंत्री के पद पर बनी रहें। इसके साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद भी उनके पास ही रहे, ताकि संगठनात्मक नेतृत्व उनके हाथ में बना रहे।

भाजपा को इससे क्या राजनीतिक लाभ मिल सकता है?

बताया जा रहा है कि भाजपा इस संभावित एकीकरण को केवल महाराष्ट्र की राजनीति तक सीमित नहीं देख रही, बल्कि इसके पीछे संसद के आगामी मानसून सत्र की रणनीति भी जुड़ी हुई है। सोमवार से शुरू होने वाले सत्र में केंद्र सरकार महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों के परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाना चाहती है।

पिछले सत्र में आवश्यक समर्थन नहीं मिलने के कारण यह विधेयक आगे नहीं बढ़ पाया था। ऐसे में यदि एनडीए के सहयोगी दलों की ताकत बढ़ती है, तो सरकार के लिए महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

दोनों गुटों को केंद्रीय मंत्री पद देने की चर्चा

सूत्रों का दावा है कि दोनों गुटों के बीच सहमति बनाने के लिए भाजपा ने एक राजनीतिक फॉर्मूला तैयार किया है। इसके तहत एनसीपी और एनसीपी-एसपी दोनों को केंद्र सरकार में एक-एक मंत्री पद देने का प्रस्ताव चर्चा में है। माना जा रहा है कि इससे दोनों पक्षों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि सार्वजनिक रूप से दोनों दल अब भी विलय की किसी भी संभावना से इनकार कर रहे हैं। सुप्रिया सुले ने हाल ही में कहा था कि जब उनके भाई अजीत पवार जीवित थे, तब विलय का प्रस्ताव जरूर सामने आया था, लेकिन उनके निधन के बाद दूसरी ओर से इसका विरोध होने लगा और मामला वहीं समाप्त हो गया। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि परिसीमन विधेयक में सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान रखा जाता है, तो उनकी पार्टी इस पर समर्थन देने पर विचार कर सकती है।

उधर, एनसीपी नेता सुनील तटकरे ने कहा कि फिलहाल विलय को लेकर कोई औपचारिक बातचीत नहीं चल रही है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि राजनीति में परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं और परिसीमन विधेयक पर मतदान के समय क्या समीकरण बनेंगे, इसका अनुमान अभी से लगाना मुश्किल है।

अजीत पवार के निधन के बाद बदलने लगे राजनीतिक समीकरण


इसी वर्ष 28 जनवरी को बारामती में हुई विमान दुर्घटना में पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन के बाद एनसीपी के भीतर नए शक्ति समीकरण बनने शुरू हो गए। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर दावा किया कि अजीत पवार के निधन के बाद पार्थ पवार ने पार्टी के अनुभवी नेताओं की बजाय अपने करीबी लोगों की नई टीम तैयार कर संगठन पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश की।

बताया जा रहा है कि इस बदलाव से कई विधायकों और वरिष्ठ नेताओं में असंतोष पैदा हुआ। कुछ नेताओं का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की जोड़ी, भाजपा के देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना के एकनाथ शिंदे जैसे अनुभवी नेताओं के सामने राजनीतिक रूप से प्रभावी नेतृत्व देने की स्थिति में नहीं है। इसी वजह से पार्टी के भीतर नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर मतभेद लगातार गहराते दिखाई दे रहे हैं।