नई दिल्ली। चर्चित सोनम रघुवंशी मामले में निचली अदालत और मेघालय हाई कोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने फिलहाल उनकी जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि चूंकि आरोपी पहले ही जेल से बाहर आ चुकी है, ऐसे में स्टे लगाने का प्रभाव सीधे तौर पर जमानत को निरस्त करने जैसा होगा। इस पूरे मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में हुई बहस में केतन अग्रवाल और सिया गोयल के नामों का भी उल्लेख सामने आया, जिससे मामला और व्यापक चर्चा में आ गया है।
हाई कोर्ट से मिली जमानत के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामलागौरतलब है कि हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या के आरोप में करीब एक वर्ष तक जेल में बंद रहीं सोनम रघुवंशी को 29 जून को मेघालय हाई कोर्ट से सशर्त जमानत प्रदान की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह तथ्य रिकॉर्ड में लिया कि सोनम पहले ही जेल से रिहा हो चुकी हैं और वर्तमान में अधीनस्थ अदालत द्वारा तय शर्तों के अनुसार शिलांग में रह रही हैं।
यह मामला न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने घटनाक्रम का विस्तृत विवरण अदालत के सामने रखा। उन्होंने बताया कि किस तरह इस कथित हत्या की साजिश में सोनम रघुवंशी की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं और मामला जांच के विभिन्न चरणों में आगे बढ़ चुका है।
सुनवाई में सामने आए नए नाम, बहस में बढ़ी संवेदनशीलतासुप्रीम कोर्ट में हुई बहस के दौरान केवल सोनम और राजा रघुवंशी का मामला ही नहीं उठा, बल्कि केतन अग्रवाल और सिया गोयल जैसे नामों का भी उल्लेख हुआ। बहस में बताया गया कि सिया गोयल के खिलाफ भी ऐसे ही आरोप हैं, जिसमें कथित रूप से अपने प्रेमी के साथ मिलकर मंगेतर की हत्या करने का मामला सामने आया है। इन संदर्भों ने सुनवाई को और अधिक जटिल और संवेदनशील बना दिया।
मेघालय सरकार ने जमानत पर उठाए सवालमेघालय सरकार ने हाई कोर्ट द्वारा दी गई जमानत के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गुरुवार को अदालत में दलील देते हुए कहा कि हाई कोर्ट ने मामले की मुख्य आरोपी को जमानत देकर गंभीर त्रुटि की है।
उन्होंने यह भी कहा कि जमानत इस आधार पर दी गई थी कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। सरकार का पक्ष रखते हुए मेहता ने दलील दी कि यह मामला गंभीर आपराधिक आरोपों से जुड़ा है और ऐसे में जमानत देने का निर्णय उचित नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और मौजूदा स्थितिसुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि चूंकि आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर है, इसलिए फिलहाल रोक लगाने का आदेश देने का अर्थ जमानत को अप्रत्यक्ष रूप से रद्द करने जैसा होगा। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की सुनवाई जारी रखने का संकेत दिया है।
फिलहाल सोनम रघुवंशी अपने खिलाफ तय शर्तों के तहत शिलांग में मौजूद हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। आने वाले समय में इस केस में न्यायिक प्रक्रिया और आगे की दिशा तय होने की संभावना है, जिस पर पूरे मामले की निगरानी बनी हुई है।