केरलम चुनाव में गहलोत का बड़ा ऐलान! सरकार बनी तो फ्री इलाज, लागू होगा राइट टू हेल्थ

जयपुर से केरलम विधानसभा चुनाव के प्रचार के लिए पहुंचे वरिष्ठ कांग्रेस नेता Ashok Gehlot ने गुरुवार को केरलम प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता करते हुए कई बड़े वादों का ऐलान किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि राज्य में कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनती है, तो आम जनता को मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाएगी। पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए मुफ्त दवा, मुफ्त जांच और इलाज जैसी योजनाओं को शामिल किया गया है, जिन्हें सत्ता में आने के बाद लागू किया जाएगा।

अपने संबोधन में गहलोत ने स्वास्थ्य अधिकार को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने पर केरलम में ‘राइट टू हेल्थ’ कानून लागू किया जाएगा, जैसा कि राजस्थान में किया गया था। इस कानून के तहत हर नागरिक को मुफ्त इलाज का अधिकार मिलेगा और इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने यह भी बताया कि केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री Oommen Chandy के नाम पर स्वास्थ्य से जुड़ी योजना को घोषणा पत्र में शामिल किया गया है, जिससे आम लोगों को सीधा लाभ मिल सके।

इसके अलावा गहलोत ने महिलाओं और छात्राओं को लेकर भी अहम घोषणाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी द्वारा जारी घोषणा पत्र में महिलाओं और स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की सुविधा देने का वादा किया गया है। उन्होंने बताया कि इस तरह की योजनाएं पहले ही कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में लागू की जा चुकी हैं और वहां इसका सकारात्मक असर देखने को मिला है। गहलोत ने यह भी जोड़ा कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार के दौरान चलाई गई कई योजनाओं को अब अन्य राज्यों के चुनावी एजेंडे में भी शामिल किया जा रहा है।

वर्तमान केरलम सरकार पर निशाना साधते हुए गहलोत ने कहा कि पिछली बार किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन को 3000 रुपये प्रतिमाह करने का वादा किया था, लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी इसे लागू नहीं किया जा सका। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है, तो महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य पेंशन योजनाओं के तहत 3000 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे।

गहलोत ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि कांग्रेस पार्टी जनता से जो भी वादा करती है, उसे पूरा करने की कोशिश करती है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे इस बार कांग्रेस गठबंधन को मौका दें, ताकि राज्य में बेहतर स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याण की योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।
राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने कहा कि राज्य में आम लोगों को बड़ी राहत देने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए थे। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा था जब सरकारी अस्पतालों में भी मरीजों को अपनी जेब से दवाइयों पर खर्च करना पड़ता था, लेकिन वर्ष 2012 में कांग्रेस सरकार ने मुफ्त दवा योजना की शुरुआत की। इस योजना ने लोगों की सोच बदल दी, क्योंकि पहली बार उन्हें बिना किसी शुल्क के दवाइयां मिलने लगीं।

इसके बाद स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करते हुए 2018 में कांग्रेस सरकार ने नि:शुल्क जांच योजना लागू की। इस योजना के तहत एमआरआई, सीटी स्कैन सहित कई महंगी मेडिकल जांचें भी मुफ्त कर दी गईं। गहलोत के अनुसार, इन पहलों ने गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को बड़ी आर्थिक राहत पहुंचाई और सरकारी अस्पतालों पर भरोसा भी बढ़ाया।

आगे बढ़ते हुए कांग्रेस सरकार ने Chiranjeevi Yojana लागू की, जिसके तहत लोगों को 25 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया गया। इस योजना में किडनी, लिवर और हार्ट ट्रांसप्लांट जैसे जटिल ऑपरेशन भी शामिल किए गए। उन्होंने कहा कि पहले ऐसे इलाज के लिए लोगों को अपनी संपत्ति तक बेचनी पड़ती थी, लेकिन इस योजना ने लाखों परिवारों को आर्थिक संकट से बचाया। इसके साथ ही 10 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा भी दिया गया, जिससे सड़क हादसों में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को वित्तीय सहायता मिल सके।

गहलोत ने यह भी बताया कि कांग्रेस सरकार ने स्वास्थ्य को अधिकार बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए कानून बनाकर ‘राइट टू हेल्थ’ लागू किया। उन्होंने कहा कि Rahul Gandhi ने भी इन योजनाओं का गहन अध्ययन किया और बाद में कई राज्यों के चुनावी घोषणापत्र में इन्हें शामिल किया गया। गहलोत के मुताबिक, सरकार की जिम्मेदारी है कि हर नागरिक को मुफ्त और बेहतर इलाज मिले, और इसी सोच के तहत यह कानून लाया गया था।

बीमा कवरेज को लेकर भी उन्होंने राजस्थान की स्थिति को मजबूत बताया। उनके अनुसार, राज्य में लगभग 93 प्रतिशत आबादी को स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल रहा है, जो अन्य राज्यों की तुलना में कहीं अधिक है। उन्होंने केंद्र सरकार की Ayushman Bharat योजना का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें केवल 5 लाख रुपये तक का कवरेज मिलता है और कई राज्यों में इसका दायरा सीमित है।

अंत में गहलोत ने कहा कि 2018 में जब राजस्थान में कांग्रेस सरकार बनी थी, तब चुनावी घोषणा पत्र को ही सरकारी दस्तावेज के रूप में लागू किया गया था। कैबिनेट की पहली बैठक में इसे मुख्य सचिव को सौंपा गया था, ताकि हर वादा समयबद्ध तरीके से पूरा हो सके। उन्होंने भरोसा जताया कि अगर केरलम में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो वहां भी इसी मॉडल को अपनाते हुए पहली ही कैबिनेट बैठक में घोषणा पत्र को आधिकारिक रूप दिया जाएगा।