कर्नाटक में विधान परिषद (MLC) की चार सीटों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) के उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी पुट्टन्ना को 908 वोटों से हराकर सीट अपने नाम कर ली। इस नतीजे के बाद जेडीएस नेता निखिल कुमारस्वामी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए बैलेट पेपर से हुए चुनाव का जिक्र किया और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए।
23 अक्टूबर को इन चारों निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ था, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को शुरू हुई। बेंगलुरु शिक्षक सीट पर जीत के साथ भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने अपना खाता खोला। वहीं, उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के शशिल जी नामोशी ने जीत दर्ज की। अन्य सीटों पर भी भाजपा उम्मीदवारों की स्थिति मजबूत रही।
एपी रंगनाथ ने पुट्टन्ना को कितने वोटों से हराया?बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीएस उम्मीदवार एपी रंगनाथ को कुल 10,810 प्रथम वरीयता वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी पुट्टन्ना के खाते में 9,902 वोट आए। इस तरह रंगनाथ ने 908 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। पुट्टन्ना इस सीट से दोबारा विधान परिषद पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
इस चुनाव में भाजपा ने जेडीएस के उम्मीदवार को समर्थन दिया था। गठबंधन के तहत बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की जिम्मेदारी जेडीएस को मिली थी, जबकि भाजपा ने अन्य तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। नतीजे ने दोनों सहयोगी दलों के बीच चुनावी तालमेल को भी चर्चा में ला दिया।
इस जीत का एक और पहलू है। वर्ष 2024 के उपचुनाव में पुट्टन्ना ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए एपी रंगनाथ को हराया था। इस बार परिणाम उलट गया और रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी को शिकस्त देकर सीट जेडीएस के खाते में डाल दी।
बैलेट पेपर से चुनाव और EVM पर निखिल कुमारस्वामी का तंजकांग्रेस लंबे समय से चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती रही है और बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग करती रही है। कर्नाटक के इस चुनाव में मतदाताओं ने बैलेट पेपर के जरिए वोट डाले। ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बाद जेडीएस नेता निखिल कुमारस्वामी ने राहुल गांधी पर निशाना साधा।
निखिल कुमारस्वामी ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को संबोधित करते हुए कहा कि इस बार EVM को लेकर आरोप लगाने का मौका नहीं होगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राज्य की मशीनरी कांग्रेस के हाथों में है और चुनाव बैलेट पेपर से हुए हैं, इसके बावजूद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) समर्थित एपी रंगनाथ ने जीत हासिल की।
उन्होंने अपने संदेश में यह भी सवाल उठाया कि जब शिक्षकों ने बैलेट पेपर से मतदान किया और कांग्रेस की सरकार के दौरान ही उसके उम्मीदवार को हार मिली, तो अब पार्टी क्या बहाना देगी। निखिल ने व्यंग्यात्मक अंदाज में पेपर चोरी का जिक्र करते हुए रंगनाथ और भाजपा-जेडीएस के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई दी।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और EVM के इस्तेमाल को लेकर लगातार सवाल उठाती रही है। हालांकि, किसी एक चुनाव के नतीजे से EVM या बैलेट पेपर की विश्वसनीयता के बारे में व्यापक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इस चुनाव में कांग्रेस की हार राजनीतिक बयानबाजी का मुद्दा जरूर बन गई है।
बेंगलुरु शिक्षक सीट पर 81.98 प्रतिशत मतदान
बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं ने अच्छी भागीदारी दिखाई। यहां कुल 27,405 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें से 22,468 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इस तरह मतदान प्रतिशत 81.98 रहा।
मतगणना के दौरान कुल 21,056 मत वैध पाए गए, जबकि 1,857 मत अवैध घोषित किए गए। प्रथम वरीयता मतों की गिनती के बाद एपी रंगनाथ को विजयी घोषित किया गया। बेंगलुरु के क्षेत्रीय आयुक्त और निर्वाचन अधिकारी अमलान आदित्य बिस्वास ने मतगणना प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी दी।
उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा की जीतकर्नाटक की दूसरी महत्वपूर्ण सीट उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार शशिल जी नामोशी ने जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार शरणप्पा मत्तूर को हराकर अपनी सीट बरकरार रखी। इस निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने संयुक्त रूप से नामोशी का समर्थन किया था। क्षेत्र में कलबुर्गी, बीदर, यादगीर, रायचूर, कोप्पल और बल्लारी जैसे जिले शामिल हैं। यहां शिक्षकों के बीच समर्थन हासिल करने के लिए दोनों पक्षों ने चुनाव प्रचार किया था। बेंगलुरु शिक्षक सीट पर जेडीएस और उत्तर-पूर्व शिक्षक सीट पर भाजपा की जीत ने गठबंधन को शुरुआती दो सफलताएं दिलाईं। शेष सीटों पर भी मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच रहा।
दक्षिण-पूर्व स्नातक सीट पर केएम सुरेश को बढ़तदक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार केएम सुरेश और कांग्रेस प्रत्याशी शशि हुलिकुंते मठ के बीच मुकाबला था। मतगणना के दौरान सुरेश कांग्रेस उम्मीदवार से आगे चल रहे थे। इस सीट पर मतदान प्रतिशत 73.58 दर्ज किया गया। हालांकि, उपलब्ध शुरुआती परिणामों में बढ़त को अंतिम जीत के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। अंतिम परिणाम निर्वाचन अधिकारी की औपचारिक घोषणा के बाद ही सुनिश्चित माना जाना चाहिए। चारों सीटों के चुनाव में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता शामिल थे। इसलिए इन परिणामों का महत्व सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग है। ये नतीजे संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में विधान परिषद के प्रतिनिधित्व को तय करते हैं और राजनीतिक दलों को अपने संगठनात्मक समर्थन का आकलन करने का अवसर भी देते हैं।
पश्चिम स्नातक सीट पर एसवी संकनूर की बढ़तपश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के मौजूदा एमएलसी एसवी संकनूर और कांग्रेस के मोहन लिंबिकाई के बीच मुकाबला हुआ। मतगणना के दूसरे दौर के बाद संकनूर ने पहली वरीयता के मतों में 3,556 वोटों की बढ़त बना ली थी। उस समय संकनूर को 12,613 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार मोहन लिंबिकाई को 9,057 वोट प्राप्त हुए थे। तब तक करीब 28,000 मतों की गिनती पूरी हो चुकी थी। इस निर्वाचन क्षेत्र में मतदान प्रतिशत 75.62 रहा। प्रथम वरीयता मतों की गिनती में बढ़त मिलने के बावजूद उस समय इसे अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता था। विधान परिषद के इन चुनावों में वरीयता के आधार पर मतगणना होने के कारण प्रक्रिया लंबी हो सकती है। इसलिए पश्चिम स्नातक सीट के बारे में शुरुआती रुझानों और आधिकारिक रूप से घोषित परिणामों के बीच अंतर करना जरूरी है।
कर्नाटक में कांग्रेस के लिए क्यों अहम है यह हार?कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है और विधान परिषद की चार सीटों के नतीजों को राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी की हार इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कांग्रेस इस सीट को बरकरार रखना चाहती थी। दूसरी ओर, भाजपा और जेडीएस ने गठबंधन के तहत उम्मीदवार उतारे और एक-दूसरे को समर्थन दिया। राज्य में कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और मुख्यमंत्री पद को लेकर मतभेदों की चर्चाएं भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रही हैं। हालांकि, इन चर्चाओं को एमएलसी चुनाव में हार का प्रत्यक्ष कारण मानने के लिए अलग प्रमाण जरूरी हैं। विधान परिषद की चार सीटों के परिणामों को राज्य की पूरी राजनीतिक स्थिति का निर्णायक पैमाना भी नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद, शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में विपक्षी गठबंधन का प्रदर्शन कांग्रेस के लिए राजनीतिक चुनौती है। खासकर तब, जब पार्टी चुनावी प्रक्रिया में बैलेट पेपर के इस्तेमाल और EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती रही है।
असम के सिलचर नगर निगम चुनाव में भी हारी थी कांग्रेसकांग्रेस को बैलेट पेपर से हुए चुनाव में हार के मुद्दे पर इससे पहले असम में भी राजनीतिक आलोचना का सामना करना पड़ा था। अक्टूबर की शुरुआत में सिलचर नगर निगम चुनाव में पार्टी को हार मिली थी। उस समय असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा था कि पार्टी बैलेट पेपर से होने वाले चुनावों में भी जीत हासिल नहीं कर पा रही है। सरमा ने यह भी कहा था कि बैलेट पेपर से चुनाव होने पर कांग्रेस और अधिक चुनाव हारती है। अब कर्नाटक में बैलेट पेपर से हुए एमएलसी चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बाद इस तरह की राजनीतिक टिप्पणियों को फिर से हवा मिली है।