दिल्ली के विवेक विहार इलाके में हुई भीषण आग की घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। बी ब्लॉक स्थित एक रिहायशी इमारत में देर रात लगी आग में अब तक 9 लोगों की जान जा चुकी है। हादसे को लेकर सामने आए प्रत्यक्षदर्शियों के बयान इस त्रासदी की भयावह तस्वीर पेश करते हैं। बताया जा रहा है कि कई लोग उस वक्त गहरी नींद में थे और उन्हें आग की गंभीरता का अंदाजा ही नहीं लग पाया, जिसके कारण वे समय रहते बाहर नहीं निकल सके।
घटनास्थल पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि इमारत के पीछे की ओर बने टॉप फ्लोर के फ्लैट्स में रहने वाले लोग आग लगने के बाद भी बाहर नहीं आ पाए। संभावना जताई जा रही है कि उन्हें समय रहते चेतावनी नहीं मिल सकी। अगर शुरुआत में बचाए गए लोग पीछे वाले फ्लैट्स में रहने वालों को फोन कर सतर्क कर देते, तो शायद कुछ जानें बचाई जा सकती थीं। इस पहलू को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं।
दमकल विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह चार मंजिला रिहायशी इमारत थी, जिसमें केवल एक ही सीढ़ी थी, जिससे आवाजाही होती थी। इसके अलावा छत पर ताला लगा हुआ था, जिससे लोगों के पास बाहर निकलने का दूसरा विकल्प नहीं बचा। उन्होंने जानकारी दी कि हादसे में कई लोग झुलसे हैं, जिनमें से एक की हालत गंभीर है और उसे गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, करीब 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
प्रत्यक्षदर्शी चरणजीत सिंह ने बताया कि मौके पर 10 से ज्यादा दमकल की गाड़ियां पहुंच चुकी थीं। बचाव कार्य के दौरान करीब 20 लोगों को बालकनी तक सीढ़ी लगाकर बाहर निकाला गया। हालांकि, इमारत के पीछे की ओर बने ऊपरी मंजिल के दो फ्लैट्स में रहने वाले लोग बाहर नहीं निकल सके। उन्होंने कहा कि यदि सामने के फ्लैट्स से निकाले गए लोग बाकी निवासियों को समय पर सचेत कर देते, तो शायद स्थिति कुछ अलग हो सकती थी।
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, आग करीब साढ़े तीन बजे के आसपास लगी और तेजी से फैलती चली गई। ऐसा प्रतीत होता है कि पीछे के फ्लैट्स में रहने वाले लोग नींद में ही फंसे रह गए। पूरी इमारत में कुल आठ फ्लैट थे, जिनमें से ऊपरी मंजिल के दो फ्लैट्स के परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। कई लोग देर तक अंदर फंसे रहे, जिससे राहत कार्य और भी चुनौतीपूर्ण हो गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आग की शुरुआत एसी में हुए धमाके से हुई थी, जिसने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया। आग लगते ही दमकल विभाग मौके पर पहुंच गया था और तुरंत बचाव अभियान शुरू किया गया। शुरुआत में लोगों को बालकनी के जरिए सीढ़ियों की मदद से बाहर निकाला गया, जबकि कुछ को पीछे की ओर से लोहे की ग्रिल काटकर रेस्क्यू किया गया। इसके बावजूद कुछ लोग समय पर बाहर नहीं निकल पाए।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, आग मुख्य रूप से दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल के फ्लैट्स में लगी थी। राहत कार्य के दौरान करीब 10 से 15 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें से दो को हल्की चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। मौके पर DDMA, ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय पुलिस के साथ करीब 12 फायर टेंडर तैनात किए गए थे, जो देर तक आग पर काबू पाने में जुटे रहे।
यह हादसा न सिर्फ सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आपात स्थिति में समय पर चेतावनी और सही व्यवस्था कितनी जरूरी होती है। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है, ताकि इस त्रासदी के पीछे की असल वजह सामने लाई जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।